देश की खबरें | पीएमएलए में जीएसटीएन से संबंधित संशोधन का फैसला विरोधियों को डराने का कदम: कांग्रेस
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नयी दिल्ली, 12 जुलाई कांग्रेस ने धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2022 में जीएसटी नेटवर्क से संबंधित संशोधन के फैसले को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि यह ‘टैक्स टेररिज्म (कर लगाकर परेशान करने)’ को बढ़ावा देने की तरह है।
पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने की नीयत से यह फैसला किया है।
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से धन शोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए), 2022 में संशोधन किया है। इसके तहत जीएसटी की प्रौद्योगिकी इकाई संभालने वाली जीएसटीएन को उन इकाइयों में शामिल कर लिया गया है, जिनके साथ ईडी सूचना साझा कर सकता है।
सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी सरकार एक साथ दो निशाने साधना चाहती है। पहला तो बाजार की कमर तोड़ना और दूसरा विपक्ष के अंगों को मरोड़ना। 7 जुलाई से पीएमएलए को जीएसटी से संबंधित विषयों में लागू किया गया। बहाना दिया गया है कि ये देश के लिए जरूरी है। 9 राज्यों ने इसका विरोध किया, इसके बाद भी इसे लागू किया गया।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘चुनाव आ रहे हैं, इसलिए सरकार ने सोचा कि अपने प्रतिद्वंदी को कैसे डराया जाए। इस सोच के साथ जीएसटी को पीएमएलए के दायरे में लाया गया है। यह केंद्र सरकार का नया औजार है।’’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार द्वारा ‘टैक्स टेररिज्म’ बढ़ावा देने की तरह है।
सिंघवी ने सवाल किया, ‘‘यह नई अधिसूचना बिना विचार विमर्श के कैसे और क्यों आई? क्या इसका कारण सरकार के डर और भय को व्यापक बनाना है? क्या ये छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापार पर नियंत्रण करने का नया तरीका है? क्या इसका विशेष संदेश सिर्फ विपक्ष के लिए होगा? जीएसटी को पीएमएलए के दायरे में लाने की अचानक जरूरत क्यों पड़ी?’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस फैसले के पीछे जो वजह बताई हैं वही कारण उसने नोटबंदी के समय बताए थे, लेकिन नतीजा क्या निकला, सबको पता है।
हक
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