देश की खबरें | रोहिणी आश्रम में रहने वाली महिलाओं से संबंधित याचिका पर अदालत ने किरण बेदी से मांगी मदद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु वीरेंद्र देव दीक्षित द्वारा रोहिणी में स्थापित एक आश्रम में रहने वाली महिलाओं के कल्याण से संबंधित मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की सेवानिवृत्त अधिकारी किरण बेदी की सहायता मांगी है।

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु वीरेंद्र देव दीक्षित द्वारा रोहिणी में स्थापित एक आश्रम में रहने वाली महिलाओं के कल्याण से संबंधित मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की सेवानिवृत्त अधिकारी किरण बेदी की सहायता मांगी है।

उच्च न्यायालय ने इससे पहले रोहिणी स्थित ‘आध्यात्मिक विद्यालय’ के कामकाज की निगरानी के लिए बेदी की देखरेख में एक कमेटी का गठन किया था। उसने निर्देश दिया कि पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल बेदी को मामले को सात अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी दी जाए।

हाल ही में पारित आदेश में मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, “किरण बेदी से सुनवाई की अगली तारीख पर मामले में इस अदालत की सहायता करने का आग्रह किया जाता है।”

पीठ ने कहा, “दिल्ली महिला आयोग की तरफ से पेश विद्वान अधिवक्ता को किरण बेदी को यह सूचित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है कि मौजूदा मामले को सात अक्टूबर 2022 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। रजिस्ट्रार जनरल भी किरण बेदी को मामले को सात अक्टूबर 2022 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी देंगे।”

2017 में गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘‍फाउंडेशन ऑफ सोशल ‍एम्पॉवरमेंट’ ने यह आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था कि कई नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को ‘आध्यात्मिक विद्यालय’ में अवैध रूप से बेहद खराब परिस्थितियों में रखा जा रहा है और उन्हें उनके अभिभावकों से मिलने की अनुमति नहीं है।

इसके बाद उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को आश्रम के संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित का पता लगाने को कहा था। अदालत ने जांच एजेंसी को नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को आश्रम में कथित तौर पर अवैध रूप से बेहद खराब परिस्थितियों में रखे जाने के आरोपों की जांच करने का भी निर्देश दिया था।

ऐसा दावा किया गया है कि कांटेदार तारों से घिरे ‘किले’ (आध्यात्मिक विद्यालय) में लड़कियों और महिलाओं को धातु से बने दरवाजे के पीछे ‘जानवरों जैसी’ परिस्थितियों में रखा जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने आध्यात्मिक विद्यालय के परिसर का मुआयना करने के लिए तत्काल एक कमेटी भी बनाई थी, जिसमें दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल और अधिवक्ता अजय वर्मा व नंदिता राव शामिल थे।

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