देश की खबरें | न्यायालय ने निजी संस्थाओं को रक्षा भूमि आवंटन में अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को रक्षा भूमि को निजी संस्थाओं को आवंटित करने में अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया और एक जांच दल गठित करने पर विचार किया।

नयी दिल्ली, सात मई उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को रक्षा भूमि को निजी संस्थाओं को आवंटित करने में अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया और एक जांच दल गठित करने पर विचार किया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने छावनी क्षेत्रों का नाम लिए बगैर कहा कि इनमें कई एकड़ में फैले खुले स्थान वाले आलीशान बंगले और विशाल ‘शॉपिंग कॉम्प्लेक्स’ रक्षा संपदा अधिकारियों की मिलीभगत से बनाए गए हैं।

न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ‘‘हम आज ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि इस मुद्दे पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगा, लेकिन विशेष छावनी क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण स्थानों पर विशाल बंगले, कई एकड़ में फैली खुली जमीन वाले आलीशान मकान 99 साल या अनिश्चित अवधि के लिए पट्टे पर दिए गए हैं।’’

यह टिप्पणी एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ द्वारा 2014 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई, जिसमें देश भर में रक्षा भूमि पर कथित अतिक्रमण की जांच की मांग की गई थी।

पीठ ने कहा कि कुछ मामलों में स्थानीय पंजीकरण प्राधिकरण के साथ मिलीभगत करके और यहां-वहां से कुछ प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद कुछ हजार रुपये में जमीन बेच दी गई, जबकि 1990 के दशक में भी उन संपत्तियों की कीमतें बहुत अधिक थीं।

शीर्ष अदालत ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वह इस विचार को मानने के लिए तैयार नहीं है कि रक्षा संपदा अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा हो सकता है।

भाटी को रक्षा अधिकारियों के अलावा एक अन्य टीम गठित करने के संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा गया, जिसमें रक्षा मंत्रालय के एक सदस्य के अलावा एक सीएजी प्रतिनिधि, एक विधिक सदस्य और एक भू-राजस्व विशेषज्ञ शामिल होंगे।

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