नैनीताल (उत्तराखंड), 28 जुलाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र से पौड़ी जिले के श्रीनगर के सुमाडी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) का स्थायी परिसर बनाए जाने के अपने निर्णय का छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से पुन:परीक्षण करने को कहा है।
सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे ने कहा कि केंद्र का निर्णय तर्कहीन, अनुचित, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 के विरूद्ध है। याचिका में एनआईटी के स्थायी परिसर के लिए सुमाडी को चुने जाने पर सुरक्षा कारणों से आपत्तियां उठाई गई थी।
याचिका में कहा गया है कि सुमाडी भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील है और संस्थान के स्थायी परिसर के लिए ठीक नहीं है।
केंद्र से एनआईटी के स्थायी परिसर को सुमाडी में स्थापित करने के अपने निर्णय का पुन:परीक्षण करने या उसके छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से उत्तराखंड में कहीं और स्थानांतरित करने का निर्णय लेने के लिए उच्च न्यायालय ने उसे चार माह का समय दिया है।
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अदालत ने भारत सरकार को इस मामले में विशेषज्ञों की सलाह लेने का निर्देश भी दिया है।
अदालत ने कहा कि सरकार को इस बात का परीक्षण करा लेना चाहिए कि यह स्थान किसी भी प्रकार से छात्रों, शिक्षकों तथा एनआईटी के कर्मचारियों के जीवन और सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं बनेगा।
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