देश की खबरें | अदालत ने केंद्र से एनआईटी का स्थायी परिसर सुमाडी में बनाने के निर्णय का पुन:परीक्षण कराने को कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नैनीताल (उत्तराखंड), 28 जुलाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र से पौड़ी जिले के श्रीनगर के सुमाडी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) का स्थायी परिसर बनाए जाने के अपने निर्णय का छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से पुन:परीक्षण करने को कहा है।

सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे ने कहा कि केंद्र का निर्णय तर्कहीन, अनुचित, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 के विरूद्ध है। याचिका में एनआईटी के स्थायी परिसर के लिए सुमाडी को चुने जाने पर सुरक्षा कारणों से आपत्तियां उठाई गई थी।

यह भी पढ़े | Maharashtra SSC Result 2020 Date and Time: महाराष्ट्र एसएससी रिजल्ट कल दोपहर 1 बजे होगा जारी, mahresult.nic.in पर ऐसे चेक करें अपने मार्क्स.

याचिका में कहा गया है कि सुमाडी भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील है और संस्थान के स्थायी परिसर के लिए ठीक नहीं है।

केंद्र से एनआईटी के स्थायी परिसर को सुमाडी में स्थापित करने के अपने निर्णय का पुन:परीक्षण करने या उसके छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से उत्तराखंड में कहीं और स्थानांतरित करने का निर्णय लेने के लिए उच्च न्यायालय ने उसे चार माह का समय दिया है।

यह भी पढ़े | मुंबईकरों के लिए GOOD NEWS: एक दिन में कोरोना के 700 नए मामले, 3 महीनों में सबसे कम केस का रेकॉर्ड.

अदालत ने भारत सरकार को इस मामले में विशेषज्ञों की सलाह लेने का निर्देश भी दिया है।

अदालत ने कहा कि सरकार को इस बात का परीक्षण करा लेना चाहिए कि यह स्थान किसी भी प्रकार से छात्रों, शिक्षकों तथा एनआईटी के कर्मचारियों के जीवन और सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं बनेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)