देश की खबरें | पूर्वोत्तर के शीर्ष छात्र निकाय ने सीएए को लेकर आंदोलन की धमकी दी

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गुवाहाटी, तीन अगस्त नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स

ऑर्गनाइजेशन (नेसो) ने बुधवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को सांप्रदायिक एवं इस क्षेत्र के मूल लोगों के विरूद्ध बताया तथा मांग की कि इसे तत्काल निरस्त किया जाए।

आठ राज्यों के सभी छात्र संगठनों के इस शीर्ष निकाय ने गुवाहाटी में बैठक की। एक दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री ने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को आश्वासन दिया था कि कोविड एहतियाती खुराक का टीकाकरण पूरा हो जाने के बाद सीएए के संबंध में नियम बनाये जाएंगे।

नेसो अध्यक्ष सैम्युएल बी जीरवा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हम सीएए नहीं स्वीकार करेंगे। आसू एवं अन्य ने उच्चतम न्यायालय में इस कानून के विरोध में याचिका दायर की थी जहां 2020 से कोई सुनवाई नहीं हुई है। यदि सीएए लागू किया जाता है तो हम उसका विरोध करते रहेंगे।’’

नेसो सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने इस कानून को ‘स्थानीय वासियों का विरोधी, पूर्वोत्तर विरोधी, जन विरोधी एवं सांप्रदायिक’ करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ सीएए को जाना ही चाहिए। इसपर पुनर्विचार का कोई कारण ही नहीं है। सरकार कह रही है कि इनर-लाइन-परमिट वाले राज्यों तथा छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को सीएए से बाहर रखा गया है। लेकिन यदि असम एवं त्रिपुरा प्रभावित होंगे तो पूरा पूर्वोत्तर प्रभावित होगा।’’

सीएए के नियमों के बन जाने से उसके क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा। दिसंबर 2019 में संसद से पारित यह कानून नियमों के अभाव में अबतक प्रभाव में नहीं आया है। सरकार ने अबतक नियम नहीं बनाने की वजह महामारी बतायी है।

सीएए में बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान से 31दिसंबर , 2014 या उससे पहले आये और भारत में पांच साल रह चुके हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

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