देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने लम्पी रोग की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मवेशियों में गांठदार त्वचा रोग (लम्पी) से संबंधित मुद्दों को उठाने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर कार्यवाही यह कहते हुए बंद कर दी है कि राज्य सरकारों ने गायों और अन्य जानवरों के टीकाकरण एवं बीमारी की रोकथाम के लिए विभिन्न कदम उठाये हैं।
नयी दिल्ली, 27 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने मवेशियों में गांठदार त्वचा रोग (लम्पी) से संबंधित मुद्दों को उठाने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर कार्यवाही यह कहते हुए बंद कर दी है कि राज्य सरकारों ने गायों और अन्य जानवरों के टीकाकरण एवं बीमारी की रोकथाम के लिए विभिन्न कदम उठाये हैं।
गांठदार त्वचा रोग एक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जिसके कारण मवेशियों को बुखार आता है तथा त्वचा पर गांठें निकल आती हैं। इसके कारण मवेशियों की मृत्यु भी हो सकती है।
शीर्ष अदालत ने अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों पर संतुष्टि व्यक्त की और कहा कि इन कार्यवाही को फिलहाल बंद किया जा सकता है और याचिकाकर्ता संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यकता पड़ने पर केंद्र या राज्य सरकारों से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि राज्यों द्वारा उठाए गए कदम मोटे तौर पर संक्रमित गायों के समय पर उपचार, लम्पी वायरस के प्रसार को रोकने, गायों और अन्य जानवरों के टीकाकरण और मूत्र क्षेत्रों के कीटाणुशोधन से संबंधित हैं।
पीठ ने 20 नवम्बर को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘इन कदमों के आलोक में, हम इस बात से संतुष्ट हैं कि संबंधित याचिकाओं पर कार्यवाही फिलहाल बंद की जा सकती है, जबकि याचिकाकर्ता(ओं) को यह छूट दी जाती कि वे किसी भी संबंधित मुद्दे से निपटने के लिए जरूरत के अनुसार केंद्र/राज्य सरकारों से संपर्क कर सकते हैं।"
इसमें कहा गया, "हमारे पास संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि राज्य सरकारें भविष्य में याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए जा सकने वाले मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई करेंगी और गंभीरता से विचार करेंगी।"
पीठ दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र और अन्य को मवेशियों की सुरक्षा तथा उन्हें गांठदार त्वचा रोग से बचाने के लिए एक कानून पारित करने के निर्देश की मांग की गई थी। इन याचिकाओं में एक सामाजिक और पशु कार्यकर्ता की ओर से दायर याचिका भी शामिल थी।
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