देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने जहांगीरपुरी में अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के हिंसा प्रभावित जहांगीरपुरी इलाके में इमारतों को ध्वस्त करने के अभियान पर अगले आदेश तक यथास्थिति बनाये रखने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। साथ ही, कहा कि वह उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के महापौर को अपने आदेश से अवगत कराए जाने के बाद भी अभियान जारी रखने पर गंभीरता से विचार करेगा।

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के हिंसा प्रभावित जहांगीरपुरी इलाके में इमारतों को ध्वस्त करने के अभियान पर अगले आदेश तक यथास्थिति बनाये रखने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। साथ ही, कहा कि वह उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के महापौर को अपने आदेश से अवगत कराए जाने के बाद भी अभियान जारी रखने पर गंभीरता से विचार करेगा।

शीर्ष अदालत ने अभियान रोके जाने से पहले बुधवार को दो बार हस्तक्षेप किया था। न्यायालय ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी किए। याचिका में दावा किया गया है कि दंगों के मुस्लिम आरोपियों की इमारतों को ध्वस्त किया गया है।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी. आर गवई ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया जिस का नौ मई, 2022 तक जवाब दिया जाना है। पीठ ने अगले आदेश तक मौजूदा यथास्थिति बनाए रखने को कहा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात ने भी शीर्ष अदालत का रुख करते हुए शिकायत की कि यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद उक्त अभियान नहीं रोका गया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को रोकने के लिए उन्हें कल (बुलडोजर के) सामने खड़ा होना पड़ा अन्यथा जहांगीरपुरी में पूरे ब्लॉक-सी को तोड़ दिया जाता।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और अन्य की दलीलों पर गौर करते हुए पीठ ने कहा, “हम उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद भी, यहां तक कि एनडीएमसी महापौर को (आदेश के बारे में) सूचित किए जाने के बाद भी इमारतों को ध्वस्त किये जाने पर गंभीरता से विचार करेंगे।”

पीठ ने कहा, "हम नोटिस पर याचिकाकर्ता से हलफनामा और जवाबी हलफनामा चाहते हैं, और तब तक, यथास्थिति बनाये रखने का आदेश जारी रहेगा।"

दवे ने बहस की शुरूआत करते हुए कहा कि यह मामला संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के दूरगामी प्रश्न उठाता है। इस पर पीठ ने पूछा, "इस मामले में राष्ट्रीय महत्व क्या है? यह सिर्फ एक क्षेत्र से संबंधित है।"

दवे ने जवाब दिया कि जहां कहीं भी दंगे हो रहे हैं, वहां यही हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि फर्जी मुठभेड़ और अब बुलडोजर, क्या राज्य की नीति का एक औजार है?

दवे ने कहा, “उन्होंने 1984 और 2002 में कभी ऐसा कुछ नहीं किया तो अब क्यों। दिल्ली में 2011 का एक कानून है जो दिसंबर 2023 तक हर अवैध अतिक्रमण को संरक्षित करता है। समाज के एक विशेष वर्ग को लक्षित किया जा रहा है। हमें संविधान निर्माताओं ने इस बारे में आगाह किया था। मैं इस पर सरदार पटेल और डॉ बी आर आंबेडकर को पढ़ूंगा। उन्होंने ऐसी स्थिति के बारे में बात की है।”

उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद के खिलाफ यह प्राथमिकी दर्ज की है कि आपने हमारी आपत्ति के बावजूद जुलूस निकाला और कहा कि हमने आपको बताया कि यह एक संवेदनशील क्षेत्र है, वहां मत जाइए।”

दवे ने कहा, “वहां जो कुछ हुआ, वह किसी उचित न्यायिक प्रक्रिया द्वारा जांच का विषय है लेकिन आप जो करते हैं, वह सिर्फ एक समुदाय के लोगों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हैं और बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया है।”

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद तोड़फोड़ जारी रही।

दवे ने कहा, “यह जहांगीरपुरी तक सीमित नहीं है और देश के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। अगर हम इसकी अनुमति देते हैं, तो कोई कानून का शासन या लोकतंत्र नहीं बचेगा।”

दवे ने कहा, “भाजपा का कोई नेता ऐसा पत्र कैसे लिख सकता है कि आप ध्वस्त करें और एनडीएमसी उसे गिरा दे? दिल्ली नगर निगम अधिनियम में नोटिस का प्रावधान है और अपील का भी प्रावधान है।”

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 731 अनधिकृत कॉलोनियां हैं जिनमें 50 लाख लोग रहते हैं।

दवे ने कहा, “ अगर आप अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं, तो आप सैनिक फार्म में जाएं। गोल्फ लिंक्स आएं, जहां मैं रहता हूं और जहां हर दूसरे घर में अतिक्रमण है। आप उन्हें छूना नहीं चाहते, बल्कि गरीब लोगों को निशाना बनाना चाहते हैं।”

सॉलिसीटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया इस साल जनवरी में शुरू हुई थी।

मुस्लिम संगठन की ओर पेश हुए एक अन्य वरिष्ठ वकील कपिल सब्बिल ने कहा कि अतिक्रमण पूरे भारत में एक गंभीर समस्या है और इसे तेजी से मुसलमानों के साथ जोड़ा जा रहा है।

सिब्बल ने कहा, “मेरी दलील है कि ऐसे मामले दूसरे राज्यों में भी हो रहे हैं। जब जुलूस निकाले जाते हैं और झगड़े होते हैं, तो सिर्फ एक समुदाय के घरों पर बुलडोजर चलाया जाता है और सत्ता में बैठे लोग फैसला करते हैं कि क्या हुआ है और क्या नहीं।”

उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश को देखिए जहां मंत्री कहते हैं कि अगर मुसलमान ऐसा करते हैं तो वे न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते। यह कौन तय करेगा? उन्हें यह शक्ति किसने दी? कोई जेल में है और उसका घर गिरा दिया गया।”

सिब्बल ने बुलडोज़र से इमारतों को ध्वस्त किए जाने पर रोक लगाने का आग्रह किया।

पीठ ने कहा, “हम इस देश में तोड़फोड़ (अभियान) पर रोक नहीं लगा रहे हैं। यह हमेशा बुलडोजर से होता है।”

मेहता ने कहा कि पिछले साल मध्य प्रदेश के खरगोन में चलाए गए इस तरह के एक अभियान के दौरान, 88 प्रभावित पक्ष हिंदू थे और 26 मुस्लिम थे।

माकपा नेता वृंदा करात की ओर से पेश हुए वकील पी. वी. सुरेंद्रनाथ ने कहा कि बुधवार को शीर्ष अदालत के यथास्थिति संबंधी आदेश के बावजूद अभियान नहीं रोका गया।

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