देश की खबरें | मंदिर प्रशासन की भगवान जगन्नाथ के रथों को संरक्षित करने की योजना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ओडिशा में वार्षिक रथ यात्रा के बाद तीन विशाल रथों को नष्ट करने की प्रथा के विपरीत श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) इस साल उन्हें संरक्षित करने पर विचार कर रहा है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

भुवनेश्वर, 23 जुलाई ओडिशा में वार्षिक रथ यात्रा के बाद तीन विशाल रथों को नष्ट करने की प्रथा के विपरीत श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) इस साल उन्हें संरक्षित करने पर विचार कर रहा है।

इन रथों का इस्तेमाल भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को श्री मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक ले जाने की नौ दिन की वार्षिक यात्रा के लिए किया जाता है।

यह भी पढ़े | हरियाणा: कुरुक्षेत्र में चाय वाले को नहीं मिला 50 हजार का लोन, बैंक ने कहा-तुम पहले से ही हो 50 करोड़ रुपये के कर्जदार.

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक कृष्ण कुमार ने बताया कि महामारी के दौरान रिकॉर्ड वक्त में लकड़ी के तीन रथ बनाने वाले बढ़ई और सेवकों के बीच इस संबंध में चर्चा की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक तकनीकी समिति गठित की है जो प्रशासन का मार्गदर्शन करेगी कि रथों को कैसे संरक्षित रखा जाए और लकड़ी के ढांचे को कीटों से कैसे सुरक्षित किया जाए।’’

यह भी पढ़े | मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री पाए गए कोरोना पॉजिटिव, राज्यपाल लालजी टंडन के अंतिम संस्कार में हुए थे शामिल.

रथ यात्रा उत्सव के बाद हर साल रथों को नष्ट कर दिया जाता है और इस लकड़ी का इस्तेमाल मंदिर की रसोई में किया जाता है लेकिन इस साल एसजेटीए जगन्नाथ बल्लव में बनाए जा रहे संग्रहालय में तीनों रथों को संरक्षित रखने पर विचार कर रहा है।

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने कहा कि रथों को जगन्नाथ बल्लव परिसर तक ले जाने के दिशा निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\