नयी दिल्ली, 24 अगस्त निजी क्षेत्र की दूसंचार कंपनियों के संगठन सीओएआई ने सरकार को दिये जाने वाले समन्वित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये पर सेवाकर से छूट देने की वित्त मंत्रालय से मांग की है।
दूरसंचार कंपनियों के संगठन सेल्यूलर आपरेटर्स एसोसियेसन आफ इंडिया (सीओएआई) ने 17 जुलाई को वित्त मंत्रालय को भेजे एक पत्र में यह मांग की है। उसने कहा है कि दूरसंचार आपरेटर कंपनियां एक अप्रैल 2016 से दूरसंचार विभाग को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोगिता शुल्क पर सेवाकर और रिवर्स चार्ज प्रणाली के तहत जीएसटी का भुगतान करती रही हैं।
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सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने पत्र में कहा है कि दूरसंचार उद्योग ने अपनी आउटपुट सेवा कर देनदारी को पूरा करने के लिये अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच करीब 6,600 करोड़ रुपये का नकद भुगतान किया है। संगठन ने कहा है कि ऐसे में दूरसंचार क्षेत्र को सेवा कर देनदारी का बोझ नहीं लादा जाना चाहिये। यह क्षेत्र पहले से ही काफी चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है।
इस संबंध में जब सीओएआई से संपर्क किया गया तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया।
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दूरसंचार क्षेत्र के इस संगठन के सदस्यों में रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन आइडिया शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अक्ट्रबर में अपने एक फैसले में दूरसंचार कंपनियों को गैर- दूरसंचार व्यवसाय से होने वाली आय को भी उनके राजस्व का हिस्सा मानने की सरकार की दलील को सही माना था। इस सकल राजस्व के एक हिस्से को कंपनियों को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम फीस के रूप में सरकार को देना होता है।
कोचर ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के बाद बढ़ी हुई मांग को भी संज्ञान में लिये जाने के बावजूद लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क पर रिवर्स चार्ज प्रणाली के तहत कुल सेवा कर 2,000 करोड़ रुपये से कम होगा।
इस लिहाज से आउटपुट सेवा कर देनदारी जिसका उस समय नकद भुगतान किया गया उसे सबंधित राशि में से कम किया जाना चाहिये।
कोचर ने कहा कि दूरसंचार उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में फीस, कर भुगतान, रोजगार सृजन के मामले में सबसे आगे रहा है। यह इस तथ्य से पता चलता है कि पिछले पांच साल के दौरान सभी दूरसंचार कंपनियों ने कुल मिलाकर सेवाकर और जीएसटी के रूप में दो लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
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