जरुरी जानकारी | टाटा पावर डीडीएल ने लगातार तीसरे साल नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व को पूरा किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर-डीडीएल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने लगातार तीसरे साल नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व (आरपीओ) को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
नयी दिल्ली, 10 अगस्त बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर-डीडीएल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने लगातार तीसरे साल नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व (आरपीओ) को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
दिल्ली के उत्तर और उत्तर-पश्चिम भाग में बिजली वितरण करने वाली कंपनी ने बयान में कहा कि उसने वित्त वर्ष 2022-23 में सौर, पवन और जल विद्युत समेत नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों से 260 करोड़ यूनिट बिजली की खरीद की। परिचालन क्षेत्र में उपभोक्ताओं को कुल बेची गई बिजली यूनिट में हरित ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से अधिक रही।
आरपीओ के तहत वितरण कंपनियों को कुल बिजली खरीद का एक निश्चित हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करना होता है।
टाटा पावर और दिल्ली सरकार की संयुक्त उद्यम कंपनी ने कहा, ‘‘टाटा पावर डीडीएल ने लगातार तीसरे साल नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व को पूरा किया है। यह देश में किसी भी वितरण कंपनी के लिये अनूठी उपलब्धि है।’’
नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व के तहत हरित स्रोतों से बिजली खरीद प्रतिशत विभिन्न राज्यों के लिये अलग-अलग होता है। हर राज्य के संबंधित विद्युत विनियामक आयोग द्वारा यह मात्रा निर्धारित की जाती है। दिल्ली के मामले में, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिये 21.35 प्रतिशत आरपीओ तय किया है।
इससे पिछले दो वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने क्रमश: 250 करोड़ यूनिट और 205 करोड़ यूनिट हरित बिजली जुटाकर अपना आरपीओ अनुपालन पूरा किया था।
बयान के अनुसार, टाटा पावर-डीडीएल लगातार तीसरे साल इस दायित्व को पूरा कर पूर्ण रूप से आरपीओ का अनुपालन करने वाली बिजली वितरण कंपनी बन गई है।
कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गणेश श्रीनिवासन ने बयान में कहा, ‘‘...हमने कंपनी की सभी गतिविधियों में पर्यावरण अनुकूल उपायों को लागू किया है और हरित बिजली को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे रहे हैं। हम ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप काम कर रहे हैं और अगले कुछ साल में अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को हरित स्रोतों से पूरा करेंगे।’’
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