देश की खबरें | मानसून में पर्यावरण की रक्षा के लिए करें पहल: मोदी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए वर्षा जल संचयन सहित पर्यावरण के अनुकूल हरसंभव पहल करने की अपील की।

नयी दिल्ली, 28 जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए वर्षा जल संचयन सहित पर्यावरण के अनुकूल हरसंभव पहल करने की अपील की।

आकाशवाणी पर मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात 2.0’ की 13वीं कड़ी के जरिए देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति का एक छोटा सा प्रयास प्रकृति और पर्यावरण को बहुत मदद करता है ।

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उन्होंने कहा, ‘‘देश के एक बड़े हिस्से में अब मानसून पहुंच चुका है | इस बार बारिश को लेकर मौसम विज्ञानी भी बहुत उत्साहित हैं। बारिश अच्छी होगी तो हमारे किसानों की फसलें अच्छी होंगी, वातावरण भी हरा-भरा होगा।’’

मोदी ने कहा कि मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों का जितना दोहन करता है, प्रकृति एक तरह से बारिश के समय उनकी भरपाई करती है।

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उन्होंने कहा कि ये तभी हो सकती है जब लोग धरती-मां का साथ दें और अपना दायित्व निभाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे द्वारा किया गया थोड़ा सा प्रयास, प्रकृति को, पर्यावरण को, बहुत मदद करता है। हमारे कई देशवासी तो इसमें बहुत बड़ा काम कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न इलाकों में किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया और कर्नाटक के मंडावली के एक 80-85 साल के बुजुर्ग कामगौड़ा जी की कहानी सुनाई।

उन्होंने बताया कि कामगौड़ा अपने जानवरों को चराते हैं। साथ ही जल-संरक्षण के लिए वे छोटे-छोटे तालाब बनाने के काम में भी जुटे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आप हैरान होंगे कि कामगौड़ा जी अब तक 16 तालाब खोद चुके हैं। अपनी मेहनत से, अपने परिश्रम से। आज पूरे इलाके को इन तालाबों से एक नया जीवन मिला है।’’

प्रधानमंत्री ने गुजरात के वडोदरा में जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से वर्षा जल संचयन की दिशा में चलायी जा रही एक मुहिम का जिक्र करते हुए कहा कि आज यहां के एक हजार स्कूलों में वर्षा जल संचयन होने लगा है तथा हर साल औसतन करीब 10 करोड़ लीटर पानी बेकार बह जाने से बचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘बरसात में प्रकृति की रक्षा के लिए, पर्यावरण की रक्षा के लिए, हमें भी कुछ इसी तरह सोचने की, कुछ करने की पहल करनी चाहिए।’’

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे गणेश चतुर्थी में पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमायें बनाएं और ऐसी प्रतिमाओं के पूजन से बचें जो नदी-तालाबों में विसर्जित की जाती हैं।

उन्होंने मानसून में लोगों से सवाधान रहने को भी कहा। उन्होंने कहा कि इस समय कई बीमारियां भी आती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना काल में हमें इनसे भी बचकर रहना है। आयुर्वेदिक औषधियां, काढ़ा, गर्म पानी, इन सबका इस्तेमाल करते रहिए, स्वस्थ रहिए।’’

ब्रजेन्द्र

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