ताइवान की राष्ट्रपति ने चीन के साथ संबंधों में स्थिरता की अपील की

राष्ट्रपति पद के चुनाव में लगातार दूसरी बार शानदार जीत हासिल करने वाली त्साई ने कहा कि चीन के साथ संबंध एक ‘‘ऐतिहासिक मोड़’’ पर पहुंच गए हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेदों और वैर को समाप्त करने के लिए संपर्कों का आधार ‘‘शांति, समता, लोकतंत्र और वार्ता’’ होनी चाहिए।

उन्होंने यहां ताइपे गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा, ‘‘हम ताइवान की जलडमरूमध्य पार यथास्थिति को कमजोर करने और उसे नीचा दिखाने वाली बीजिंग प्राधिकारियों की ‘एक देश, दो प्रणालियों’ की नीति को स्वीकार नहीं करेंगें।’’

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के संक्रमण से बचने के लिए इस कार्यक्रम में सामाजिक दूरी का पालन किया गया और लोगों ने मास्क लगा कर इसमें भाग लिया।

त्साई सत्तारूढ़ ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी’ का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो ताइवान की औपचारिक आजादी की पक्षधर है। चीन इसके खिलाफ है और उसका कहना है कि वह इसे रोकने के लिए बलप्रयोग से भी नहीं चूकेगा।

हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों पर चीनी कार्रवाई के बाद हुए चुनाव में त्साई ने शानदार जीत हासिल की थी।

त्साई एशिया की एकमात्र आधुनिक महिला नेता हैं, जो किसी राजनीतिक परिवार का हिस्सा न होने के बावजूद शीर्ष पद पर पहुंची हैं।

इस कार्यक्रम में ताइवान के 15 औपचारिक कूटनीतिक सहयोगियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

ताइवान के साथ अमेरिका के अनौपचारिक लेकिन मजबूत संबंध हैं। अमेरिका ताइवान को सैन्य समर्थन का मुख्य स्रोत है।

कार्यक्रम में साई के संबोधन से पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ का बधाई संदेश पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने साई के ‘‘साहस और उनके नेतृत्व’’ की सराहना की।

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