जरुरी जानकारी | ताइवान ने अलीबाबा को ई-वाणिज्य कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने को कहा

ताइवान ने यह आदेश ऐसे समय दिया है, जब चीनी कंपनियों पर अमेरिका और भारत समेत कई देशों में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं।

ताइवान और चीन गृहयुद्ध के बाद 1949 में अलग हुए। उनके बीच काई आधिकारिक संबंध नहीं है लेकिन व्यापार और निवेश रिश्तों को बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। ताइवान सुरक्षा नजरिये से चीनी निवेश पर नजर रखता है और उन चीजों से बचता है, जिससे उसके मजबूत पड़ोसी देश की स्थिति सुरक्षा दृष्टिकोण से और मजबूत हो।

यह भी पढ़े | Kaun Banega Crorepati 12: अमिताभ बच्चन ने केबीसी 12 की शूटिंग की शुरू, सेट से फोटो की शेयर.

आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि ताओबाओ ताइवान का परिचालन ब्रिटिश कंपनी कर रही है, लेकिन अली बाबा समूह के पास कंपनी में हिस्सेदारी है जिससे उसे उपभोक्ताओं से जुड़े मंच के नियंत्रण की अनुमति है। यह ताइवान के नियम का उल्लंघन है।

अलीबाबा समूह का मुख्यालय शंघाई के दक्षिण पश्चिम में स्थित हानझोऊ में है। यह कुल बिक्री मात्रा के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी ई-वाणिज्य कंपनी है।

यह भी पढ़े | Ganesh Chaturthi 2020: अमिताभ बच्चन ने लालबाग के राजा की पुरानी फोटो शेयर कर, बाप्पा का किया स्वागत.

मत्रालय के अनुसार ताओबाओ ताइवान के साथ हुए समझौते के तहत अलीबाबा समूह के चीन स्थित सर्वर पर सदस्यों के लेन-देन के आंकड़े जाते हैं।

उसने कहा कि कि इससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अलीबाबा के पास ब्रिटिश क्लॉडाग वेंचर इनवेस्टमेंट लि. में 29 प्रतिशत हिस्सेदारी है जो कानूनी सीमा 30 प्रतिशत से कम है।

मंत्रालय के अनुसार लेकिन शेयरधारकों का जो ढांचा है, उसमें अली बाबा के पास वीटो निर्णय के जरिये ब्रिटिश उद्यम पर नियंत्रण रखने की अनुमति मिल जाती है।

आदेश में अलीबाबा को छह महीने के भीतर अपनी हिस्सेदारी बेचने को कहा गया है।

इस बारे में फिलहाल अली बाबा समूह की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं मिल पायी है।

ताइवान उन देशों में शामिल है जिसने चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी हुवावेई टेक्नोलॉजीज लि. के दूरसंचार उपकरणों के उपयोग पर पाबंदी लगायी है।

एपी

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)