लखनऊ, 29 अक्टूबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती द्वारा निलंबित किये गये बसपा के बागी विधायकों ने बृहस्पतिवार को कहा कि न तो उन्हें निष्कासित किया गया है और न ही उनकी किसी अन्य पार्टी में शामिल होने की कोई योजना है।
बागी विधायकों में शामिल असलम राइनी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘यह पार्टी अध्यक्ष का विशेषाधिकार है और उन्हें जो सही लगे करें लेकिन हम किसी अन्य पार्टी में शामिल होने नहीं जा रहे हैं।’’
बसपा अध्यक्ष द्वारा निलंबित किये जाने के बाद पार्टी के सात विधायकों की एक बैठक आयोजित की गई।
बसपा अध्यक्ष मायावती ने सुबह ही सात विधायकों असलम अली (धौलाना-हापुड) , असलम राइनी (भिनगा-श्रावस्ती) , मुजतबा सिद़दीकी (प्रतापपुर-प्रयागराज) , हाकिम लाल बिंद (हंडिया-प्रयागराज), सुषमा पटेल (मुंगरा बादशाहपुर- जौनपुर) , हरगोविंद भार्गव (सिधौली-सीतापुर) और वंदना सिंह (सगड़ी-आजमगढ़) को बसपा से निलंबित कर दिया।
विधायक हाकिम बिंद ने कहा, ‘‘मायावती हमारी नेता हैं और उनका फैसला हमें स्वीकार्य और स्वागत योग्य है। हमें निष्कासित नहीं, निलंबित किया गया है और हम और 15 महीने के लिए विधायक हैं। हमें मायावती, भाजपा या समाजवादी पार्टी, किससे मिलना है, यह केवल समय बताएगा।’’
सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने से इनकार करते हुए बिंद ने कहा कि उन्होंने और अन्य सदस्यों ने नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं किये थे इसलिए हलफ़नामा देकर विरोध किया।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपने हस्ताक्षर के दुरुपयोग के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे तो बिंद ने कहा कि वे तभी कानूनी कार्रवाई करेंगे जब बसपा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी।
विधायक सुषमा पटेल ने अखिलेश यादव से मिलने की बात स्वीकार की और पीटीआई- से बातचीत में कहा, ‘‘मैं निलंबन का स्वागत करती हूं और हमने कोई अपराध नहीं किया है।’’
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