देश की खबरें | छात्र संघों, युवा संगठनों ने नयी पर्यावरण प्रभाव आकलन मसौदा अधिसूचना के स्थगन की मांग की

नयी दिल्ली, 25 जून देशभर के 50 से अधिक छात्र संघों और युवा संगठनों ने बृहस्पतिवार को पर्यावरण मंत्रालय से नए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) मसौदा अधिसूचना को यह आरोप लगाते हुए स्थगित करने की अपील की कि उसके प्रस्तावित संशोधन पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए ‘‘विनाशकारी’’ साबित हो सकते हैं।

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर को भेजे पत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, एआईएसएफ और 48 अन्य विद्यार्थी संगठनों ने मांग की कि ईआईए की मौजूदा मसौदा अधिसूचना कोविड-19 संकट खत्म हो जाने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार फिर से लिखी जाए।

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पत्र में कहा गया है, ‘‘मंत्रालय ने मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान आपके नेतृत्व में मसौदा ईआईए 2020 अधिसूचना जारी की। हम यह पत्र लिखकर आपसे इस आधार पर मसौदे को स्थगित खने का अनुरोध करते हैं कि यह पारस्थितिकी और हमारे देश के लोगों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।’’

पत्र में कहा गया है, ‘‘हमारा अनुरोध है कि जब स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता अत्यंत अहम विषय नहीं रहें, तब विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार इसे फिर से लिखा जाए और जारी किया जाए ताकि भारत में हरियाली बहाल हो सके।’’

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इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि नई ईआईए मसौदा अधिसूचना में कार्योत्तर मंजूरी, कई उद्योगों को जन सुनवाई से छूट, उद्योगों को साल में दो के बजाय बस एक अनुपालन रिपोर्ट देने की अनुमति, खनन परियोजनाओं और नदी घाटी परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी की वैधता में विस्तार आदि जैसे कई विवादास्पद संशोधन लाने का प्रस्ताव है।

मंत्रालय ने 23 मार्च को मसौदा ईआईए अधिसूचना प्रकाशित की थी और उस पर 22 मई तक लोगों से राय एवं सुझाव मांगे थे।

लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान अधिसूचना के प्रकाशन पर चिंता प्रकट करते हुए कई प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार ने सात मई को इसकी समय सीमा बढ़ाकर 30 जून कर दी।

दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब,गोवा, पुडुचेरी, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, गुजरात, आंध्रप्रदेश आदि कई राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं संगठनों के छात्रों ने यह पत्र लिखा है और मांग की है कि आर्थिक पुनरूत्थान पर्यावरण से बिना समझौता किये किया जाना चाहिए।

इस पत्र पर आईसा, यूथ फोर स्वराज, जेएनयूएसयू, आईआईएसईआर, जैन विश्वविद्यालय, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल आदि के छात्र संगठनों के हस्ताक्षर हैं।

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में सस्टेनेबलिटी कमिटी की सदस्य तनिका शंकर और स्मृद्धि अनंत ने लिखा, ‘‘ भारत के युवा, जिनका भविष्य आज के फैसलों से सीधे प्रभावित होगा, का दृढ़ता से मानना है कि ईआईएस के वर्तमान संशोधन पर्यावरण एवं समाज के लिए खतरा पैदा करते हैं, इससे खनन एवं निर्माण से संबद्ध कई कारोबारों एवं विध्वंसकारी उद्योगों को खुली छूट मिल जाएगी।’’

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