विदेश की खबरें | श्रीलंका का मुख्य विपक्षी दल एसजेबी नयी सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जन बालवेगया (एसजेबी) ने सोमवार को कहा कि वह देश में स्थिरता लाने के लिए अगली सरकार का नेतृत्व करने को तैयार है और संसद में इस कदम के खिलाफ किसी भी तरह के प्रतिरोध को ‘‘विश्वासघाती कृत्य’’ के रूप में देखा जाएगा।
कोलंबो, 11 जुलाई श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जन बालवेगया (एसजेबी) ने सोमवार को कहा कि वह देश में स्थिरता लाने के लिए अगली सरकार का नेतृत्व करने को तैयार है और संसद में इस कदम के खिलाफ किसी भी तरह के प्रतिरोध को ‘‘विश्वासघाती कृत्य’’ के रूप में देखा जाएगा।
एसजेबी नेता सजिथ प्रेमदासा का बयान ऐसे वक्त आया है, जब प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के कार्यालय ने कहा है कि एक नयी सर्वदलीय अंतरिम सरकार के गठन के साथ ही समूचा मंत्रिमंडल इस्तीफा दे देगा और अपनी जिम्मेदारियों को सौंप देगा।
राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शनिवार को घोषणा की कि वह बुधवार को इस्तीफा देंगे। प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने भी कहा है कि नयी सरकार बनने के बाद वह पद छोड़ देंगे। राजपक्षे और विक्रमसिंघे के इस्तीफे पर राजी होने के बाद विपक्षी दलों ने रविवार को बातचीत की और सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने का फैसला किया।
न्यूज पोर्टल ‘इकोनॉमी नेक्स्ट’ के मुताबिक एसजेबी के सोशल मीडिया चैनल पर जारी एक वीडियो बयान में प्रेमदासा ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर देश का नेतृत्व करने और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार नियुक्त करेंगे। कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अगर कोई इसका विरोध करता है या संसद में बाधा डालने की कोशिश करता है तो हम इसे एक विश्वासघाती कृत्य के रूप में देखेंगे।’’ प्रेमदासा ने कहा, ‘‘हम मातृभूमि की रक्षा के लिए, मातृभूमि को नेतृत्व देने के लिए, अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए तैयार हैं।’’
प्रेमदासा ने लोगों के विरोध को रेखांकित करते हुए कहा कि इसकी वजह से गोटबाया पद से इस्तीफा देने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह मातृभूमि, लोगों, अरागल (संघर्ष) की जीत है।’’
इस बीच, श्रीलंका के चर्च ने कहा है कि राष्ट्रपति राजपक्षे को देश को दिवालिया होने की स्थिति में ले जाने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के तत्काल इस्तीफे का आह्वान किया।
अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल पर एक बयान जारी करते हुए सीलोन के चर्च ने कहा कि धार्मिक नेताओं, नागरिक संस्थाओं से लेकर आम जनता तक का राष्ट्रपति राजपक्षे से इस्तीफे की मांग करना इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि उनके पास अब इस देश पर शासन करने का कोई जनादेश नहीं है।
चर्च ने कहा कि कोई सरकार जब अपने ही लोगों का विश्वास खो चुकी हो, तो उसे दूसरे देशों या अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों से सम्मान नहीं मिलेगा।
चर्च ने असल प्रतिनिधित्व वाली अंतरिम सरकार के गठन का आह्वान किया, जो लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विश्वास को फिर से हासिल कर सके। इस तरह के प्रशासन को आर्थिक पुनरुद्धार के लिए उपयुक्त लघु, मध्यम और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करते हुए वर्तमान संकट का तेजी से समाधान करने में मदद मिलेगी।
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