देश की खबरें | खेल संहिता पालन नहीं करने वाले खेल महासंघों को निलंबित किया जाए: दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से उन राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को निलंबित करने को कहा है जो खेल संहिता का पालन नहीं कर रहे। उच्च न्यायालय ने साथ ही कहा कि इस तरह के महासंघों को कोई छूट नहीं दी जाए।

नयी दिल्ली, 31 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से उन राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को निलंबित करने को कहा है जो खेल संहिता का पालन नहीं कर रहे। उच्च न्यायालय ने साथ ही कहा कि इस तरह के महासंघों को कोई छूट नहीं दी जाए।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एनएसएफ के रूप में मान्यता के लिए खेल संहिता का अनुपालन करना जरूरी है और जब तक कोई इकाई संहिता का सख्ती से पालन नहीं करती तब तक उसे सार्वजनिक कोष से मिलने वाले फायदे को भूल जाना चाहिए जिसमें सरकार के स्वामित्व वाले स्टेडियम और खेल सुविधाओं का इस्तेमाल भी शामिल है।

अदालत ने कहा कि ‘अधिकतर एनएसएफ’ प्रबंध समिति में खिलाड़ियों के अनिवार्य 25 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की शर्त को पूरा नहीं करते। अदालत ने साथ ही कहा कि ‘‘संचालन के मामलों में एक ऐसा चरण आता है जब अड़ियल लोगों को बाहर करना पड़ता है और उनका गैरकानूनी रूप से सरकारी उदारता का आनंद लेना बंद करना पड़ता है, एक ऐसा विशेषाधिकार जिसके लिए वे योग्य नहीं हैं।’’

न्यायमूर्ति विकास महाजन की भी मौजूदगी वाली पीठ ने 26 मई के अपने आदेश में कहा,‘‘किसी भी एनएसएफ या खेल संस्था को अन्यायपूर्ण लाभ नहीं मिलना चाहिए। निष्पक्षता और वैधता को सभी सरकारी मामलों में शामिल करने की आवश्यकता है। इसलिए यह विवेकपूर्ण है, वास्तव में अनिवार्य है कि अनुपालन नहीं वाले एनएसएफ को कोई और छूट नहीं दी जाए या उनके प्रति उदारता न दिखाई जाए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘खेल संहिता का पालन जरूरी है। यह एक एनएसएफ के रूप में मान्यता प्रदान करने और ऐसी स्थिति से मिलने वाले लाभों तक पहुंच के लिए अनिवार्य है। लाभ विभिन्न रूपों में हैं: कर लाभ, यात्रा रियायतें, खिलाड़ियों और एनएसएफ के अधिकारियों को आवास और आतिथ्य, सरकार के स्वामित्व वाले स्टेडियम और खेल सुविधाओं का उपयोग।’’

अदालत ने कहा, ‘‘यह सारा खर्च सार्वजनिक धन से किया जाता है। जब तक कोई एनएसएफ/खेल संस्था/पंजीकृत सोसायटी/संघ खेल संहिता और अदालत के आदेशों का सख्ती से पूरी तरह पालन नहीं करता, तब तक वह खुद को ऐसे किसी भी लाभ से वंचित कर देगा।"

एनएसएफ द्वारा खेल संहिता का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर अदालत का आदेश पारित किया गया था।

अदालत ने आदेश दिया, ‘‘भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के सचिव यह सुनिश्चित करें कि जिम्नास्टिक, हैंडबॉल, राष्ट्रीय योगासन, टेनिस वॉलीबॉल, मलखंब और मोटर स्पोर्ट्स के साथ-साथ घुड़सवारी, रोइंग, गोल्फ, स्क्वाश रैकेट, नौकायन, पोलो के संबंधित एनएसएफ सोमवार तक मंत्रालय को अपना संविधान उपलब्ध कराएं।’’

अदालत ने कहा, ‘‘उसी सप्ताह के दौरान इसकी जांच की जाएगी और अगर वे खेल संहिता का अनुपालन नहीं कर रहे हैं तो उनकी मान्यता के निलंबन के लिए निर्देश / नोटिस जारी किए जाएंगे। इस संबंध में एक हलफनामा संयुक्त सचिव द्वारा दायर किया जाएगा जिसके लिए उक्त मंत्रालय के सचिव (खेल) की पूर्व स्वीकृति ली गई हो।’’

अदालत ने कहा कि रिट याचिका 2020 से लंबित थी और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पंद्रह महीने का समय काफी लंबा है। मामले की अगली सुनवाई दो जून को होगी।

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