नयी दिल्ली, एक फरवरी उच्चतम न्यायालय ने बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े मामलों में अमेरिका के साथ आपसी समझौता की संभावना तलाशने के मुद्दे पर केंद्र से जवाब मांगा है क्योंकि वहां रह रहे भारतीयों के कारण ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है।
उच्चतम न्यायालय ने 2004 से अमेरिका में रह रहे एक व्यक्ति को पिछले साल मई में अदालत के आदेश पर अपने बच्चे को भारत वापस लाने में विफल रहने के लिए अवमानना का दोषी ठहराते हुए यह आदेश पारित किया।
न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति ए.एस. ओका की पीठ ने 16 जनवरी के अपने आदेश में कहा कि 2007 में शादी करने वाली महिला द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका एक दुर्भाग्यपूर्ण वैवाहिक विवाद का परिणाम है और ‘‘जैसा कि इस तरह के हर विवाद में होता है, सबसे अधिक मुसीबत झेलने वाला बच्चा है।’’
पीठ ने कहा कि पति द्वारा किए गए ‘‘उल्लंघन’’ के परिणामस्वरूप, महिला को अपने 12 वर्षीय बेटे की अभिरक्षा से वंचित होना पड़ा है, जिसके लिए वह 11 मई, 2022 के आदेश के अनुसार हकदार है।
तय शर्तों के अनुसार, बच्चा, जो उस समय छठी कक्षा में था, अजमेर में ही रहेगा और 10वीं कक्षा तक अपनी शिक्षा पूरी करेगा और उसके बाद बच्चे को अमेरिका में भेज दिया जाएगा, जहां उसके पिता रहते हैं।
इस बात पर भी सहमति बनी थी कि जब तक बच्चा 10वीं तक की शिक्षा पूरी नहीं कर लेता, तब तक वह हर साल एक जून से 30 जून तक अपने पिता के साथ कनाडा और अमेरिका की यात्रा करेगा।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह व्यक्ति पिछले साल सात जून को अजमेर आया था और बेटे को अपने साथ कनाडा ले गया था लेकिन वह उसे भारत वापस लाने में विफल रहा।
पीठ ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों के बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े मामलों में वृद्धि के मद्देनजर इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ आपसी समझौते की संभावना तलाशने के लिए केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया।
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