देश की खबरें | कभी-कभी कुछ चीजों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर होता है : न्यायमूर्ति कौल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजय किशन कौल ने मंगलवार को कहा कि ‘कभी-कभी कुछ चीजों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर होता है’।

नयी दिल्ली, पांच दिसंबर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजय किशन कौल ने मंगलवार को कहा कि ‘कभी-कभी कुछ चीजों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर होता है’।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पदोन्नति और स्थानांतरण के विषय पर कॉलेजियम की सिफारिशों पर कदम उठाने में केंद्र सरकार की कथित देरी से संबंधित याचिकाओं को वाद सूची से अचानक हटाये जाने का कुछ वकीलों ने आरोप लगाया, जिसपर न्यायमूर्ति कौल ने यह टिप्पणी की।

शीर्ष अदालत के विचारार्थ दो याचिकाएं हैं, जिनमें से एक में कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में सरकार पर देरी करने का आरोप लगाया गया है।

न्यायमूर्ति कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने 20 नवंबर को विषय की सुनवाई की थी और इसे आगे की सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध करने को कहा था।

याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहे एक वकील ने पीठ के समक्ष मुद्दे का उल्लेख किया और कहा कि याचिकाएं आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जानी थीं, लेकिन वाद सूची से हटा दी गईं।

न्यायमूर्ति कौल ने वकील से कहा, ‘‘मैंने इन्हें नहीं हटाया है।’’

बाद में, एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यह अजीब है कि इसे हटा दिया गया है।’’

न्यायमूर्ति कौल ने भूषण से कहा, “आपके मित्र ने सुबह (मुद्दे का) उल्लेख किया था। मैंने सिर्फ एक बात कही थी, मैंने वह विषय नहीं हटाया है।”

भूषण ने जब कहा कि अदालत को रजिस्ट्री से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, तो न्यायमूर्ति कौल ने उनसे कहा, “मुझे यकीन है कि प्रधान न्यायाधीश को इसकी जानकारी है।”

भूषण ने कहा कि यह बहुत असामान्य है कि विषय को हटा दिया गया, जबकि इसे आज सूचीबद्ध करने का न्यायिक आदेश था।

न्यायमूर्ति कौल ने वरिष्ठ वकील से कहा, “कभी-कभी कुछ चीजों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर होता है।”

भूषण ने कहा कि यह मामला काफी समय से न्यायमूर्ति कौल की अगुवाई वाली पीठ देख रही है।

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, “इसलिए मैं स्पष्ट करता हूं कि ऐसा नहीं है कि मैंने मामला हटा दिया है या मैं इस मामले को सुनने का इच्छुक नहीं हूं।”

शीर्ष अदालत ने 20 नवंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कॉलेजियम द्वारा स्थानांतरण के लिए अनुशंसित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को केंद्र द्वारा “चुनने” के मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि इससे अच्छा संकेत नहीं जाएगा।

कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय और केंद्र के बीच तनातनी का एक मुद्दा बन गया है।

शीर्ष अदालत जिन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, उनमें एडवोकेट्स एसोसिएशन, बेंगलुरु द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है, जिसमें अनुशंसित नामों को मंजूरी देने के लिए 2021 के फैसले में न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पदोन्नति और स्थानांतरण के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करने को लेकर केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई की मांग की गई है।

एक याचिका में, न्यायाधीशों की समय पर नियुक्ति के लिए शीर्ष अदालत द्वारा 20 अप्रैल, 2021 के आदेश में निर्धारित समय-सीमा की (केंद्र द्वारा) “जानबूझकर अवज्ञा” करने का आरोप लगाया गया है।

उक्त आदेश में, अदालत ने कहा था कि अगर कॉलेजियम सर्वसम्मति से अपनी सिफारिशें दोहराती है तो केंद्र तीन-चार सप्ताह के भीतर न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

CSK vs PBKS, IPL 2026 7th Match Scorecard: रोमांचक मुकाबले में पंजाब किंग्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से दी करारी शिकस्त, श्रेयस अय्यर ने खेली कप्तानी पारी; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

GT vs RR, IPL 2026 9th Match Stats And Preview: नरेंद्र मोदी स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स को हराकर अपनी विजयी रथ जारी रखना चाहेगी गुजरात टाइटंस, मैच से पहले जानें स्टैट्स एंड प्रीव्यू

Hardik Pandya IPL Stats Against DC: आईपीएल इतिहास में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ कुछ ऐसा रहा हैं हार्दिक पांड्या का प्रदर्शन, ऑलराउंडर के आकंड़ों पर एक नजर

Rohit Sharma IPL Stats Against DC: आईपीएल इतिहास में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ कुछ ऐसा रहा हैं रोहित शर्मा का प्रदर्शन, ‘हिटमैन’ के आकंड़ों पर एक नजर