नयी दिल्ली, 16 दिसंबर संसद की सुरक्षा में सेंध के मामले में छठी गिरफ्तारी-राजस्थान के नागौर से महेश कुमावत की हुई है, जो कथित तौर पर साजिश रचने के लिए पिछले दो वर्षों से अन्य आरोपियों के संपर्क में था और सबूत मिटाने के लिए उनके मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
एक सप्ताह के लिए पुलिस हिरासत में भेजे गए सभी आरोपी अलग-अलग राज्यों-कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। सूत्रों ने बताया कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा है, पुलिस टीम 13 दिसंबर की घटना की आगे की जांच के लिए आरोपियों के राज्यों के लिए रवाना हो गई हैं।
लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपी ‘‘देश में अराजकता पैदा करना चाहते थे ताकि वे सरकार को अपनी अनुचित और अवैध मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर कर सकें।’’
इसके बाद विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर ने कुमावत (32) को दिल्ली पुलिस की हिरासत में भेज दिया।
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान कुमावत का आमना-सामना अन्य आरोपियों से कराया जाएगा। शनिवार को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की एक टीम ने संसद के अंदर और बाहर के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए।
मामले की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं सांसद प्रताप सिम्हा का बयान दर्ज करने की भी योजना है। सदन के भीतर सुरक्षा में सेंध लगाने वाले दो लोगों को सिम्हा के जरिए पास मिला था।
इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को सदन के सदस्यों को सूचित किया कि उन्होंने संसद परिसर में सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए एक ‘‘उच्चाधिकार प्राप्त समिति’’ का गठन किया है। उन्होंने कहा कि समिति यह सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करेगी कि 13 दिसंबर जैसी घटनाएं दोबारा न हों।
यह समिति केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) महानिदेशक की अध्यक्षता वाले पैनल के अतिरिक्त है, जो घटना की जांच कर रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह इसकी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सदन के साथ साझा करेंगे।
कुमावत को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और अदालत में पेश किया गया। सूत्रों ने आरोप लगाया कि कुमावत संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की साजिश का हिस्सा था, जहां उसे ‘केन’ के साथ दूसरे गेट पर खड़ा होना था, लेकिन वह घटना के दिन 13 दिसंबर को नहीं आ सका।
अभियोजक ने कहा, ‘‘वह (कुमावत) पिछले दो वर्षों से साजिश रचने में अन्य आरोपी व्यक्तियों के संपर्क में था। उसने सबूतों को नष्ट करने और बड़ी साजिश को छिपाने के लिए मोबाइल फोन को नष्ट करने में ‘मास्टरमाइंड’ आरोपी ललित झा की मदद की।’’
अभियोजक ने अदालत ने कहा कि पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए कुमावत से पूछताछ जरूरी है।
पुलिस ने 15 दिन के लिए कुमावत को हिरासत में दिये जाने का अनुरोध किया था। बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस की अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि कुमावत को उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए बिना किसी कारण के गिरफ्तार किया गया।
बहस के दौरान, अभियोजक ने अदालत को बताया कि ‘‘हमले के पीछे के वास्तविक मकसद और दुश्मन देश तथा आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध का पता लगाने के लिए’’ आरोपी की हिरासत की आवश्यकता है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि कुमावत को सबूत नष्ट करने और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने बताया कि कुमावत आरोपियों द्वारा बनाए गए ‘भगत सिंह फैन क्लब पेज’ का सदस्य था, यह पेज अब ‘डिलीट’ हो चुका है।
ऐसा संदेह है कि कुचामन शहर के निवासी कुमावत ने झा को नागौर में ठहरने में मदद की, जहां वह बुधवार की घटना के बाद भाग गया था।
अधिकारी ने कहा कि कुमावत बृहस्पतिवार रात ललित झा के साथ थाने आया था और दोनों को विशेष प्रकोष्ठ के हवाले कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि तब से कुमावत से पूछताछ की जा रही थी।
पुलिस झा को जल्द ही राजस्थान के नागौर ले जाएगी जहां वह भागने के बाद बुधवार को ठहरा था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उसे उस स्थान पर ले जाया जाएगा, जहां उसने अपना एवं अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन नष्ट करने का दावा किया है। सभी पांचों आरोपियों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘अन्य आरोपियों की तरह, कुमावत क्रांतिकारी विचारों के बारे में बात करता था।’’ उसने अन्य युवाओं को अपने समूह में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
कुमावत के इंस्टाग्राम अकाउंट से पता चलता है कि वह ‘‘भगत सिंह और छत्रपति शिवाजी से बेहद प्रेरित था। उसने अपनी प्रोफाइल पर ‘इंकलाब जिंदाबाद’, और ‘अगर देश में क्रांति लानी है तो खुद क्रांतिकारी होना चाहिए’ जैसे नारे लिखे थे।’’
सूत्रों के मुताबिक, एक पोस्ट में उसने लिखा, ‘‘जब सरकार गलत हो, आपका सही होना खतरनाक हो सकता है।’’
अधिकारियों ने बताया कि मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों ने खुलासा किया है कि उन्होंने लोकसभा के कक्ष में कूदकर धुआं फैलाने की योजना पर सहमति बनाने से पहले खुद को आग लगाने और पर्चे बांटने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया था।
आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए थे और उन्होंने ‘केन’ से पीली गैस उड़ाते हुए नारेबाजी की जिसके बाद सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया था। लगभग उसी समय संसद भवन के बाहर दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम देवी ने ‘केन’ से रंगीन धुआं फैलाते हुए ‘‘तानाशाही नहीं चलेगी’’ के नारे लगाए थे।
पांचवें आरोपी ललित झा ने संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर कथित तौर पर प्रसारित किए।
पूछताछ में मनोरंजन ने बताया कि वह सामाजिक कार्यों से जुड़ा है। एक अधिकारी ने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले मनोरंजन ने 2014 में ‘‘स्वयंसेवक कार्य’’ के लिए कंबोडिया और बैंकॉक की यात्रा की थी। वह बेरोजगार था और अपने निजी खर्च और यात्रा के लिए अपने माता-पिता से पैसे लेता था।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘पुलिस उसकी यात्रा के लिए उसे मिले पैसे के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही है। यह पता चला है कि वह उड़ान से बेंगलुरु से दिल्ली आया था। उसने अपने माता-पिता को बताया था कि वह बेंगलुरु जा रहा है लेकिन वह दिल्ली आ गया।’’
पूरे प्रकरण के कथित ‘मास्टरमाइंड’ ललित झा के माता-पिता हतप्रभ हैं।
बिहार के दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड अंतर्गत रामपुर उदय गांव निवासी ललित झा के पिता देवानंद झा अपने जर्जर पैतृक घर के बाहर लोगों के जमावड़े से असहज दिखे। वह कोलकाता में पुरोहित का काम कर अपनी जीविका चलाते हैं।
पूरे घटनाक्रम से सदमे दिखीं देवानंद की पत्नी मंजुला ने सिसकियों के बीच कहा, ‘‘मेरा बच्चा बदमाश नहीं है। वह गलत कामों में शामिल नहीं हो सकता। वह हमेशा लोगों की मदद करता रहा है। उसने तीन बार अपना रक्त दान किया है।’’
जांच से अवगत दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘ (लोकसभा कक्ष में कूदने की) इस साजिश को अंतिम रूप देने से पहले उन्होंने (आरोपियों ने) कुछ ऐसे तरीके तलाशे थे जिनके जरिए वे प्रभावशाली तरीके से सरकार तक अपना संदेश पहुंचा सकें।’’
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