मुंबई, तीन मार्च नियामकीय बंदिशों का सामना कर रहे न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के आधा दर्जन पूर्व निदेशकों ने धोखाधड़ी से प्रभावित सहकारी बैंक में 122 करोड़ रुपये के कथित गबन के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया है। मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सहकारी बैंक के इन पूर्व निदेशकों ने दावा किया है कि पिछले महीने सामने आई कथित धोखाधड़ी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) वर्ष 2020 से पांच वर्षों में बैंक के खजाने से 122 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी की जांच कर रही है। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच के क्रम में इसके सात पूर्व निदेशकों को तलब किया था।
धोखाधड़ी सामने आने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फरवरी के मध्य में न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक पर कई प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, इनमें से कुछ प्रतिबंधों को बाद में शिथिल कर दिया गया था।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जांच के दौरान सात में से छह पूर्व निदेशकों ने कहा कि उन्हें बैंक से नकदी के गबन के बारे में जानकारी नहीं थी। उनमें से कुछ लोगों ने पुलिस के समक्ष अपने बयान भी दर्ज कराए हैं।
अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान पूर्व निदेशकों ने दावा किया कि सीईओ और अन्य आरोपी व्यक्ति उन्हें ऑडिट रिपोर्ट दिखाते थे और उन्हें बताते थे कि बैंक में सब कुछ ‘ठीक’ है।
इस मामले में बैंक के पूर्व महाप्रबंधक हितेन मेहता और पूर्व सीईओ अभिमन्यु भोअन समेत चार लोग अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
ईओडब्ल्यू ने आरबीआई को भी पत्र लिखकर यह समझने की कोशिश की है कि पिछले महीने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक का निरीक्षण शुरू करने के लिए उन्हें किस बात ने प्रेरित किया।
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