जरुरी जानकारी | सीतारमण ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, राज्यों से लंबित मुद्दों का समाधान करने का आग्रह

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नयी दिल्ली, 30 मई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और क्रियान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के तहत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और राज्यों से समस्याओं को दूर कर लंबित मुद्दों का समाधान करने का आग्रह किया।

एनआईसीडीआईटी के अंतर्गत पर्यावरण अनुकूल सभी सुविधाओं से युक्त (प्लग एंड प्ले) और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के साथ नये स्मार्ट औद्योगिक शहरों का निर्माण किया जाना है।

यह पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के ढांचे के तहत है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में मजबूती से स्थापित करने के लिये आवंटन को लेकर भूखंड तैयार रखना है।

एनआईसीडीआईटी के शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की यह दूसरी बैठक थी। बैठक में सदस्य ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे कार्यों की प्रगति में तेजी लाने के लिये सूचनाओं को साझा करके सभी लंबित मुद्दों को हल करें।

सीतारमण ने केंद और राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों को ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम करना चाहिए।

आधिकारिक बयान के अनुसार वित्त मंत्री ने कहा कि ‘फायर कॉरिडोर’ (एफ-माल ढुलाई, आई-औद्योगिक, आर- रेलवे, ई-एक्सप्रेसवे) देश के औद्योगीकरण और आर्थिक विकास को गति देगा।

वित्त मंत्रालय ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘औद्योगिक गलियारों के विकास के लिये सरकार के विभिन्न मंत्रालय भारतमाला, सागरमाला, राष्ट्रीय जलमार्ग, मालगाड़ियों के लिये अलग गलियारा, राष्ट्रीय गैस ग्रिड आदि जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत मल्टी मॉडल कनेक्टविटी उपलब्ध कराएंगे।’’

बैठक में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी भी शामिल हुए। इसके अलावा, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी इसमें मौजूद थे।

चार राज्यों... गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, जबकि 9 राज्यों... बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल, पंजाब, झारखंड, कर्नाटक और राजस्थान के मंत्रियों के अलावा सभी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में गोयल ने परियोजनाओं को वित्तीय रूप से व्यवहारिक होने और उचित दर पर जमीन का तेजी से आवंटन की बात कही।

उन्होंने कहा कि तेजी से निवेश को लेकर राज्यों को नवोन्मेषी मॉडल अपनाने चाहिए। साथ ही बिजली की वाजिब दर सुनिश्चित करनी चाहिए।

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