बेंगलुरू, एक अक्टूबर कर्नाटक राज्य गान के लिए दिवंगत मैसूर अनंतस्वामी द्वारा रचित धुन के चयन संबंधी राज्य सरकार के 25 सितंबर के आदेश को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है।
गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की याचिका पर सुनवाई करने वाले न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित ने शुक्रवार को सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
दिवंगत कवि पुरस्कार विजेता कुवेम्पु द्वारा लिखी गई कविता, 'जय भारत जननिया तनुजाते' को 2004 में राज्य गान घोषित किया गया था, लेकिन तब से राज्य गान के गायन की अवधि, धुन और शब्दों को जोड़े जाने को लेकर विवाद जारी हैं।
जून 2013 में, इस उद्देश्य के लिए गठित वसंत कनकपुरा समिति ने कहा था कि सी अश्वथ द्वारा रचित धुन को राज्य गान के लिए जारी रखा जाएगा, क्योंकि अनंतस्वामी भी इसके लिए सहमत थे। समिति ने कहा था कि अनंतस्वामी ने पूरे गीत के लिए धुन नहीं बनाई थी।
बाद में डॉ. चन्नवीरा कनवी समिति ने भी सी अश्वत की बनायी धुन की सिफारिश की। नवीनतम एच. आर. लीलावती समिति ने अनंतस्वामी द्वारा निर्धारित धुन की सिफारिश की थी।
किकेरी कृष्णमूर्ति ने उच्च न्यायालय के समक्ष दायर अपनी याचिका में दलील दी है कि उन्होंने 17 सितंबर को इसके खिलाफ राज्य सरकार को एक प्रतिवेदन दिया था, लेकिन सरकार ने आगे बढ़ते हुए 25 सितंबर को आदेश जारी किया।
याचिका में राज्य सरकार के संबंधित आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए दावा किया गया है कि सरकार के नये आदेश को लागू करना असंभव है, क्योंकि ‘मैसूर अनंतस्वामी द्वारा रचित राज्य गान की पूरी धुन नहीं है।’
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