देश की खबरें | देशद्रोह मामला : उच्च न्यायालय में पुलिस ने शरजील इमाम की जमानत याचिका का विरोध किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका का विरोध किया। उसे वर्ष 2019 में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

नयी दिल्ली, 24 मार्च दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका का विरोध किया। उसे वर्ष 2019 में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने कहा कि निचली अदालत द्वारा 24 जनवरी को जमानत अर्जी पर जो फैसला दिया गया और जिसे इमाम ने चुनौती दी है वह स्पष्ट, कानूनी रूप से वैध है और इसमें ऐसा कोई तत्व नहीं है जिसके आधार पर उच्च न्यायालय हस्तक्षेप करे।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तारीख सूचीबद्ध की है।

इमाम का पक्ष रख रहे वकील ने सुनवाई के लिए और पहले की तारीख देने का अनुरोध किया तो पीठ ने कहा, ‘‘ अदालत को तंग नहीं करें और अदालत को भयभीत करने की कोशिश नहीं करें।’’

पुलिस ने इमाम की जमानत याचिका के जवाब में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में कहा कि आरोपी ने गलत तरीके से उल्लेख किया है कि ‘‘170 से अधिक गवाहों का बयान दर्ज किया जा चुका है’’ जबकि तथ्य यह है कि केवल 43 गवाहों से मामले में पूछताछ की गई है और उनमें से भी अधिकतर से पूछताछ औपचारिक प्रकृति की थी।

पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद के जरिये दाखिल रिपोर्ट में कहा, ‘‘ निचली अदालत ने 15 मार्च 2022 को आरोप तय किया और दैनिक आधार पर सुनवाई का प्रस्ताव किया। 15 मार्च 2022 के आदेश के मुताबिक अदालत ने 26 मार्च 2022 की तरीख मामले को स्वीकार करने/इंकार करने और 28-29 मार्च 2022 की तारीख अभियोजन के सबूत के लिए तय की। इसलिए सुनवाई में कोई देरी नहीं हुई है और निचली अदालत ने अपने आदेश में ही पहले ही मामले की सुनवाई तेज कर दी है।’’

पुलिस ने कहा कि मौजूदा अपील पर सुनवाई का कोई उचित अधार नहीं है जिसमें निचली अदालत द्वारा जमानत देने से इंकार करने और अर्जी को खारिज करने का फैसला दिया गया है।

गौरतलब है कि अभियोजन ने आरोप लगाया है कि इमाम ने कथित तौर पर 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में और 16 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए भाषण में असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश से अलग करने की बात की।

इमाम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा- 124 ए(देशद्रोह) का मामला दर्ज किया गया है और इसमें उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। इमाम ने 24 जनवरी को निचली अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज करने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

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