नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने बृहस्पतिवार को एनडीटीवी के संस्थापकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को प्रतिभूति बाजार से दो साल के लिए प्रतिबंधित करने के भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश को खारिज कर दिया। उनपर यह रोक भेदिया कारोबार मामले में लगाई गई थी।
हालांकि अपीलीय न्यायाधिकरण ने मीडिया समूह के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विक्रमादित्य चंद्रा के खिलाफ आदेश को आंशिक तौर पर खारिज किया। मामले पर दोबारा से फैसला के लिये उसे वापस सेबी के पास भेजा है।
सैट के आदेश में कहा गया है कि चंद्रा ने कीमत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी (पीएसआई-तीन) के दौरान जो कारोबार किये, उसपर फिर से विचार किये जाने की जरूरत है।
पीएसआई-3 एनडीटीवी नेटवर्क के गैर-समाचार कारोबार में दो करोड़ डॉलर के निवेश के लिये उद्यम पूंजी कोष कॉम वेंचर्स छह, एल.पी. के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनी से संबंधित है।
सेबी ने नवंबर, 2020 में प्रणय रॉय और राधिका रॉय को प्रतिभूति बाजार से दो साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया था। साथ ही उन्हें भेदिया कारोबार में शामिल होने को लेकर 16.97 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लाभ का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
इसके अलावा, नियामक ने भेदिया कारोबार से जुड़े सात व्यक्तियों और इकाइयों को एक से दो साल की अवधि के लिये कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से रोक दिया था। साथ ही, उनमें से कुछ को कीमत से जुड़ी अप्रकाशित संवेदनशील सूचना (यूपीएसआई) की जानकारी होने के दौरान शेयरों में लेन-देन से हुए अवैध लाभ को लौटाने को कहा गया।
चंद्रा को भी अवैध लाभ के रूप में प्राप्त 6.67 लाख रुपये लौटाने को कहा गया था।
सेबी ने यह आदेश सितंबर, 2006 से जून 2008 के दौरान जांच में प्राप्त सबूतों के आधार पर दिया। जांच में भेदिया कारोबार नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने सेबी के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी के पुनर्गठन के बारे में जानकारी कीमत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी नहीं थी और प्रणय रॉय और राधिका रॉय कोई भेदिया नहीं थे।
न्यायाधिकरण ने कहा कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने एनडीटीवी के अनुपालन अधिकारी से कारोबार से पहले मंजूरी हासिल कर ली थी। इसीलिए, इन दोनों व्यक्तियों का कारोबार एनडीटीवी आचार संहिता और भेदिया कारोबार निषेध (पीआईटी) नियमन के अनुरूप था।
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