नयी दिल्ली, 29 सितंबर बाजार नियामक सेबी ने पात्रता मानदंड और खुलासा जरूरतों को युक्तिसंगत बनाने के लिये नये राइट इश्यू नियम अधिसूचित किये हैं। इस पहल का मकसद कोष जुटाने को आसान, त्वरित और लागत प्रभावी बनाना है।
नियामक ने सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्कोलजर) नियमनों में संशोधन किया है। अधिसूचना के अनुसार यह सोमवार से प्रभाव में आ गया है।
नये नियमों के तहत कंपनी को संक्षिप्त रूप से खुलासा करने की अनुमति मिल गयी है। लेकिन इसके लिये जरूरी है कि कंपनी नियमित आधार पर पिछले एक साल से रिपोर्ट, बयान, सूचीबद्धता से जुड़े नियमों के अनुपालन के बारे में सूचना देती रही हो। पहले यह समयसीमा तीन साल थी।
यह उन मामलों में भी लागू होगा जहां नियंत्रण अधिग्रहण के बाद प्रबंधन में बदलाव के पश्चात तीन साल का समय पूरा हो गया है।
यह भी पढ़े | Aadhaar में बिना किसी डॉक्यूमेंट के घर बैठे एड्रेस कैसे बदलें/अपडेट करें?.
खुलासा जरूरतों को युक्तिसंगत बनाया गया है ताकि सूचना देने के मामले में दोहराव न हो।
इसके अलावा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने राइट ऑफर दस्तावेज के मामले में कंपनियों के लिये सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी है। यानी यदि 50 करोड़ रुपये तक राइट इश्यू के जरिये जुटाने हैं तो उसके लिये कंपनियों को राइट ऑफर दस्तावेज नियामक के पास जमा करने की जरूरत नहीं होगी।
इसके अलावा, अनिवार्य 90 प्रतिशत न्यूनतम अभिदान उन जारीकर्ताओं पर लागू नहीं होगा, जहां निर्गम का मकसद परियोजना के लिए पूंजीगत व्यय के वित्तपोषण के अलावा अन्य वित्तपोषण है।
नियामक ने यह भी कहा कि स्थगन, अभियोजन कार्यवाही और ऑडिट पात्रता के कारण लंबित कारण बताओ नोटिस होने पर कंपनी तेजी से पूरा होने वाला राइट्स इश्यू ला सकती है। हालांकि, इसके लिये कंपनी को पेशकश दस्तावेज में जरूरी जानकारी देनी होगी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY