देश की खबरें | सक्सेना ने पशु कल्याण बोर्ड के सदस्यों को नामित करने की फाइल केजरीवाल को वापस भेजी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड (डीएडब्ल्यूबी) में सदस्यों को नामित करने से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वापस भेज दी है। साथ में कहा कि नामित लोगों के पास अनुभव का अभाव है और इनमें शामिल एक पूर्व नौकरशाह की छवि “खराब’’ है।

नयी दिल्ली, चार जनवरी दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड (डीएडब्ल्यूबी) में सदस्यों को नामित करने से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वापस भेज दी है। साथ में कहा कि नामित लोगों के पास अनुभव का अभाव है और इनमें शामिल एक पूर्व नौकरशाह की छवि “खराब’’ है।

उपराज्यपाल के दफ्तर के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि सक्सेना ने इस टिप्पणी के साथ फाइल लौटाई है कि “ डीएडब्ल्यूबी के पुनर्गठन के प्रस्ताव की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि नामित किए जा रहे सदस्य बेदाग और ईमानदार हों, उन्होंने पशु के कल्याण के लिए काम किया हो और बोर्ड का गठन ऐसे हो कि उसमें विभिन्न संबंधित संगठनों का प्रतिनिधित्व हो।”

सूत्रों ने दावा किया कि डीएडब्ल्यूबी (कार्यकारी समिति) का पुनर्गठन सितंबर 2020 से लंबित है क्योंकि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इसके सदस्यों को नामित करने में 27 महीने का समय लगा दिया है।

फाइल को मुख्यमंत्री केजरीवाल ने स्वीकृति प्रदान की थी और इसे 14 दिसंबर 2022 को उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया था। सूत्रों ने बताया कि इसमें पूर्व लोकसेवक राकेश कुमार का नाम भी शामिल है जो सतर्कता विभाग की जांच का सामना कर रहे हैं और अन्य नाम सबीना गढ़ीहोके का है।

उन्होंने कहा कि ये डीएडब्ल्यूबी के नियमों का उल्लंघन है जो साफ तौर पर कहते हैं कि बोर्ड में नामित शख्स राज्य में पशु कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।

सक्सेना ने फाइल पर नोट लिखा है, "(सेवानिवृत्त दानिक्स अधिकारी) राकेश कुमार गौड़ को डीएडब्ल्यूबी के सदस्य के रूप में नामित किया गया है, हालांकि सेवानिवृत्त अफसर सतर्कता पहलू से पाक-साफ नहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “ सुश्री सबीना गढ़ीहोके संबंधित क्षेत्रों में मूल्यवान संसाधन हो सकती हैं, लेकिन उनके पास पशु कल्याण के क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है, जिसे बोर्ड के नियमों में जरूरी बताया गया है। ”

उपराज्यपाल ने कहा है कि सदस्यों को नामित करने के प्रस्ताव को उनके विचार के लिए दो हफ्ते के अंदर फिर से पेश किया जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि इनमें ‘गोसदन फाउंडेशन’ नाम के संगठन के पांच प्रतिनिधि भी शामिल हैं जो गौशाला श्रेणी के तहत हैं।

उपराज्यपाल के दफ्तर के सूत्रों ने कहा कि उच्च न्यायालय मई 2022 से मुद्दे की निगरानी कर रहा है।

यह फाइल 27 जून से लेकर सात दिसंबर 2022 तक पांच महीने से ज्यादा वक्त तक विकास मंत्री के कार्यालय में लंबित रही। सूत्रों ने दावा किया कि इसके बाद फाइल दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई से एक दिन पहले 14 दिसंबर को उपराज्यपाल को भेजी गई।

सक्सेना ने फाइल पर नोट लिखा है, “ मैंने जनता से जुड़े अहम कार्यों और शासन के महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित फाइलों के निपटान में मंत्रियों की ओर से अत्याधिक देरी और उदासीन रवैये को कई बार रेखांकित किया है।”

सूत्रों ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से "ऐसी चिंताओं" को दूर करने और मंत्रियों के समक्ष सभी लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करने की अपेक्षा की।

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