देश की खबरें | रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने 'जगन्नाथ धाम' विवाद में प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

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भुवनेश्वर, छह मई रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा तटीय शहर दीघा के जगन्नाथ मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' कहने पर पैदा हुये विवाद में हस्तक्षेप करने की मांग की।

हाल ही में इस मंदिर का उद्घाटन किया गया है।

पद्मश्री पुरस्कार विजेता पटनायक श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर ही "असली धाम" है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दीघा के मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' कहना भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों को स्वीकार्य नहीं है।

पटनायक ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की घोषणा से यह बात लोगों के ध्यान में आई है कि दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' कहा जा रहा है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ को समर्पित नए मंदिर का निर्माण वास्तव में सराहनीय है, लेकिन इसे 'जगन्नाथ धाम' कहने से दुनिया भर में उनके लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।"

उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथों के अनुसार केवल एक ही मान्यता प्राप्त जगन्नाथ धाम है, जो पुरी में स्थित है। उन्होंने कहा कि किसी अन्य स्थान के लिए इस प्रतिष्ठित नाम का इस्तेमाल करने से धार्मिक भ्रम पैदा हो सकता है और यह हिंदू धर्म की दीर्घकालिक आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के विपरीत है।

पटनायक ने मोदी को लिखे पत्र में कहा, "गहरे सम्मान और श्रद्धा के साथ, महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति आपकी अटूट भक्ति और समृद्ध जगन्नाथ संस्कृति के संरक्षण में आपके ईमानदार प्रयासों को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। मैं विनम्रतापूर्वक आपसे इस मामले पर ध्यान देने का अनुरोध करता हूं और सम्मानपूर्वक आपसे उचित कार्रवाई करने पर विचार करने का आग्रह करता हूं।"

पटनायक ने इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

विवाद के बाद सोशल मीडिया पर 'पुरी का बहिष्कार' अभियान के बारे में पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए ओडिशा की उपमुख्यमंत्री पार्वती परिदा (जो पर्यटन विभाग की भी प्रभारी हैं) ने कहा कि उन्होंने (अभियान चलाने वालों ने) वास्तव में पुरी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

परिदा ने कहा, "इस तरह के अभियान पुरी के पर्यटन को प्रभावित नहीं करेंगे, बल्कि इसकी क्षमता को बढ़ाएंगे। इस तरह, पुरी पहले से ही दुनिया भर के पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है। हमारे ऊपर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद है और यह अभियान हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकता।"

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दीघा के मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' के रूप में चित्रित करने पर परिदा ने कहा, "ममता बनर्जी द्वारा श्री जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा की छवि को धूमिल करने का प्रयास उनके कद के अनुरूप नहीं है।"

गजपति महाराजा (जो एसजेटीएमसी के अध्यक्ष भी हैं) ने कहा है कि दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' नहीं कहा जा सकता।

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