देश की खबरें | रॉबर्ट वाद्रा भूमि खरीद: मामला खारिज करने से अदालत का इनकार, गिरफ्तारी पर रोक चार हफ्ते तक बढ़ाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाद्रा की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उनसे संबंधित एक कंपनी द्वारा बीकानेर में भूमि खरीद प्रकरण को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मामले को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था।

जोधपुर, 22 दिसंबर राजस्थान उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाद्रा की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उनसे संबंधित एक कंपनी द्वारा बीकानेर में भूमि खरीद प्रकरण को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मामले को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था।

न्यायमूर्ति पी. एस. भाटी की अदालत ने, हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को चार और हफ्ते तक के लिए बढ़ा दिया ताकि वह दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष अपील कर सकें, लेकिन न्यायमूर्ति भाटी ने कथित धनशोधन मामले में ‘कोई कठोर कार्रवाई नहीं’ करने की उनकी याचिका खारिज कर दी।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति वाद्रा उनसे जुड़ी कंपनी ‘स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी’ द्वारा बीकानेर के कोलायत में जमीन खरीदने से संबंधित मामले में जांच का सामना कर रहे हैं।

कोलायत में 275 बीघा जमीन खरीदने से जुड़ी शिकायत के आधार पर ईडी ने एक प्रवर्तन मामले से संबंधित सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। यह भूमि रॉबर्ट वाद्रा की ओर से दिये गये चेक का इस्तेमाल करके कथित तौर पर एक मध्यस्थ के चालक महेश नागरे के नाम पर खरीदी गई थी।

ईडी का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आर. डी. रस्तोगी ने कहा कि ईसीआईआर निरस्त करने की वाद्रा की रिट याचिका को खारिज कर दिया गया है।

ईडी ने रॉबर्ट वाद्रा और उनकी मां मॉरीन वाद्रा को नवंबर 2018 में समन जारी किया था, जो कथित तौर पर स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी में साझेदार हैं, लेकिन उनमें से कोई भी एजेंसी के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बजाय, उन्होंने “कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने” का आदेश देने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की तरफ से याचिका का विरोध किया गया था। उन्होंने कहा था कि 2018 से एक-पक्षीय रोक लागू थी और रॉबर्ट वाद्रा की हिरासत में पूछताछ के लिए ईडी द्वारा आवेदन दायर किया गया था।

रस्तोगी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में ईडी के पक्ष में पहले ही फैसला कर दिया था। रस्तोगी ने दलील दी कि ईडी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर करना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और यह धनशोधन का मामला है।

रस्तोगी ने कहा, ‘‘इसके पहले वाद्रा और अन्य की गिरफ्तारी पर इस शर्त के साथ रोक लगाई थी कि वे जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन ईडी ने वाद्रा की ओर से पूछताछ में सहयोग नहीं किये जाने का हवाला देते हुए अदालत से उन्हें हिरासत में लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई तेज कर दी।’’

राजस्थान उच्च न्यायालय ने धनशोधन मामले में बुधवार को सुनवाई पूरी की। वाद्रा की ओर से के.टी.एस. तुलसी ने दलील दी।

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