देश की खबरें | अनुसूचित जाति-जनजाति कोटा में बढ़ोतरी के बाद कर्नाटक में आरक्षण संबंधी मांग बढ़ी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अनुसूचित जाति-जनजाति का कोटा बढ़ाने के कर्नाटक सरकार के फैसले के बाद राज्य में विभिन्न समुदायों की ओर से आरक्षण संबंधी मांग बढ़ने लगी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मंगलवार को कहा कि सभी समुदायों की आकांक्षाएं हैं और इस मामले में उचित विचार विमर्श के बाद फैसला किया जाएगा।

बेंगलुरु, 11 अक्टूबर अनुसूचित जाति-जनजाति का कोटा बढ़ाने के कर्नाटक सरकार के फैसले के बाद राज्य में विभिन्न समुदायों की ओर से आरक्षण संबंधी मांग बढ़ने लगी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मंगलवार को कहा कि सभी समुदायों की आकांक्षाएं हैं और इस मामले में उचित विचार विमर्श के बाद फैसला किया जाएगा।

विभिन्न समुदायों की ओर से आरक्षण की मांग की जा रही है। पंचमसाली लिंगायत समुदय पिछड़ा वर्ग की श्रेणी-2ए (अभी वे श्रेणी 3 बी में हैं) में शामिल किये जाने की मांग कर रहा है, इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल कुरुब समुदाय जनजाति श्रेणी में शामिल होने के लिए दबाव बना रहा है। वीरशैव-लिंगायत और वोक्कालीग समुदाय केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किये जाने का इच्छुक है।

बोम्मई ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘प्राकृतिक रूप से सभी की आकांक्षाएं हैं, हमने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति पर पहले ध्यान दिया है। हम (अनुसूचित जाति-जनजाति का कोटा बढ़ाने के प्रावधान को) कानूनी संरक्षण देने पर काम कर रहे हैं।’’

यहां संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछड़ा वर्ग को आरक्षण से संबंधित मामले पर एक स्थायी पिछड़ा वर्ग आयोग के अलावा विशेषज्ञ भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर सरकार समय-समय पर उचित निर्णय लेगी।

कर्नाटक सरकार ने गत आठ अक्टूबर को अनुसूचित जाति का आरक्षण 15 से बढ़कर 17 फीसदी और अनुसूचित जनजाति का आरक्षण तीन से बढ़ाकर सात फीसदी करने का फैसल किया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार इस बढ़े हुए कोटे को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए भी पहल करेगी।

राज्य में आगामी छह महीनों के अंदर चुनाव होने हैं, इसलिए सरकार के कोटा बढ़ाने के कदम को कुछ लोग राजनीतिक नजरिये से देख रहे हैं।

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