देश की खबरें | पाठ्यक्रमों से डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत हटाने से बच्चों में अंधविश्वास पनप सकता है: विशेषज्ञ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विशेषज्ञों ने 10वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को हटाने के निर्णय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे बच्चों में अंधविश्वास और अतार्किक धारणाएं पनप सकती हैं।
नयी दिल्ली, नौ मई विशेषज्ञों ने 10वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को हटाने के निर्णय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे बच्चों में अंधविश्वास और अतार्किक धारणाएं पनप सकती हैं।
प्रकृतिवादी चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रस्तावित विकासवाद का सिद्धांत बताता है कि सभी जीव प्राकृतिक चयन के माध्यम से विकसित हुए हैं, जो विरासत में मिली उन विशेषताओं को अंगीकार करते हैं जो किसी व्यक्ति की प्रतिस्पर्धा करने, जीवित रहने और प्रजनन करने की क्षमता में सुधार करती हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से जैविक उत्पत्ति के सिद्धांत को हटाने का फैसला किया है।
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे प्रसिद्ध संस्थानों के 1,800 से अधिक वैज्ञानिकों, विज्ञान शिक्षकों और शिक्षकों ने इस कदम का विरोध किया है और इस मामले में अपनी चिंता जताते हुए एक खुला पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा गया है, ‘‘हम 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से डार्विन के उत्पत्ति सिद्धांत को बाहर करने से चिंतित हैं, जैसा कि सूचना में देखा गया है।’’
निर्णय को हैरानी भरा बताते हुए विकासवादी जीवविज्ञानी मानते हैं कि सिद्धांत इतना मौलिक और बुनियादी है कि विकासवाद के सिद्धांत की अवधारणाओं के प्रयोग किये बिना प्राकृतिक विज्ञान के किसी भी पहलू को नहीं समझा जा सकता।
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु की ‘इवोल्यूशनरी एंड ऑर्गनिज्मल बायोलॉजी यूनिट’ के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष अमिताभ जोशी ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘विभिन्न रूपों में जीवन का अस्तित्व, समूहों के भीतर और समूहों के बीच पारिस्थितिक अंतःक्रियाएं, जीवों और उनके तत्काल परिवेश के बीच संबंध को समझाया नहीं जा सकता है।’’
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