नयी दिल्ली, एक नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को वन प्राधिकारियों को दक्षिणी रिज इलाके से अतिक्रमण हटाने के लिए कदम उठाने या अवमानना कार्रवाई का सामना करने को कहा। अदालत ने वहां "कंक्रीट के जंगल" की मौजूदगी और राष्ट्रीय राजधानी में बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर चिंता जतायी।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने दिल्ली के रिज क्षेत्र से संबंधित मामलों पर सुनवायी करते हुए कहा, ‘‘दक्षिणी रिज में क्या हो रहा है? यह चौंकाने वाला है। तीन सौ हेक्टेयर भूमि, पूरे पर अतिक्रमण...यह स्वीकार्य नहीं है। दिल्ली के लोग पेड़ चाहते हैं। प्रदूषण के स्तर, वायु गुणवत्ता देखें।’’
न्यायमूर्ति सिंह ने यह भी कहा कि अदालत मध्य रिज के अंदर एक सड़क के माध्यम से मोटर वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं देगी, जहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) स्टेशन है और केंद्र से परिसर तक पहुंचने के लिए एक "व्यावहारिक समाधान" पेश करने को कहा।
जब केंद्र सरकार के वकील ने दलील दी कि स्टेशन "रणनीतिक कारण" के कारण वहां स्थापित किया गया है और उस तक पहुंच आवश्यक है, तो अदालत ने कहा, "यह उचित है लेकिन हम कारों को अनुमति नहीं देंगे। एक व्यवहारिक समाधान खोजें। चौबीस कर्मचारी कारों से (रिज के अंदर) नहीं जा सकते।’’
न्यायमूर्ति सिंह ने सुझाव दिया कि वहां तक जाने वाले इसरो स्टेशन तक पैदल जा सकते हैं, साइकिल का उपयोग कर सकते हैं या पाली में काम कर सकते हैं।
दक्षिणी रिज के अंदर अतिक्रमण के संबंध में, अदालत ने वन विभाग से कहा कि वह शहर में जंगलों का संरक्षक है और एक अधिसूचित जंगल के अंदर "किसी भी चीज" की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने वन विभाग के प्रमुख सचिव से कहा, ‘‘मैं आपको एक सप्ताह का समय दूंगा। दिखाइए कि (अतिक्रमण हटाने के संबंध में) क्या कार्रवाई की गई है... अन्यथा हम अवमानना का मामला बनाएंगे। यह चौंकाने वाला है, यह सब कंक्रीट का जंगल है। जंगल की जगह कंक्रीट का जंगल है।’’ अदालत ने अगली सुनवाई से पहले एक रिपोर्ट मांगी। शीर्ष अधिकारी ने अदालत को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अदालत ने 28 अगस्त को कहा था कि दिल्ली में रिज क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी के "फेफड़े" हैं और यहां 864 हेक्टेयर मध्य रिज के अंदर 63 संरचनाओं की मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की थी।
राष्ट्रीय राजधानी का रिज दिल्ली में अरावली पहाड़ी श्रृंखला का विस्तार है और एक चट्टानी, पहाड़ी और जंगली क्षेत्र है।
मामले की अगली सुनवाई 8 और 9 नवंबर को होगी।
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