चंडीगढ़, आठ मार्च पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को अकाल तख्त और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के दो जत्थेदारों को हटाए जाने की निंदा करते हुए कहा कि यह प्रतिशोध की कार्रवाई लगती है।
अमृतसर में अकाल तख्त और रूपनगर जिले के आनंदपुर साहिब स्थित तख्त श्री केसगढ़ साहिब सिख धर्म की पांच शीर्ष धार्मिक संस्थाओं में शामिल हैं।
मान की यह प्रतिक्रिया गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संगठन शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा ज्ञानी रघबीर सिंह को अकाल तख्त जत्थेदार और ज्ञानी सुल्तान सिंह को तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार पद से हटाए जाने के एक दिन बाद आई है।
एसजीपीसी ने ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज को तख्त श्री केशगढ़ साहिब का नया जत्थेदार नियुक्त किया है।
जब तक अकाल तख्त के नये जत्थेदार की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक गडगज संस्था के कार्यकारी जत्थेदार के रूप में भी काम करेंगे।
एसजीपीसी के इस कदम पर पूछे गए सवाल के जवाब में मान ने कहा, “देखिए, यह धार्मिक मामला है। होना तो यह चाहिए था कि राजनीति, धर्म से सीखे। लेकिन हो यह रहा है कि राजनीति, धर्म सिखा रही है। ”
मान ने सिंगापुर में प्रशिक्षण के लिए गये स्कूल प्रधानाचार्य के एक समूह को रवाना करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम से इतर इस बात पर भी जोर दिया कि एसजीपीसी के आम चुनाव होने चाहिए।
मान ने सुखबीर सिंह बादल समेत शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेताओं का जिक्र करते हुए कहा, “आपने अपनी सारी गलतियों को स्वीकार किया और यहां तक कि ‘तनखाह’ (धार्मिक दंड) भी लिया। अब आप कहते हैं कि हम जत्थेदारों को हटा देंगे। यह एक तरह की बदलखोरी लगती है।”
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने पिछले वर्ष दो दिसंबर को बादल समेत शिअद नेताओं को 2007 से 2017 तक पंजाब में उनकी सरकार द्वारा की गई ‘गलतियों’ के लिए धार्मिक दंड सुनाया था।
ज्ञानी रघबीर सिंह, ज्ञानी सुल्तान सिंह और ज्ञानी हरप्रीत सिंह उन पांच सिंह साहिबानों (सिख जत्थेदारों) में शामिल थे, जिन्होंने यह सजा सुनाई थी।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह को 10 फरवरी को तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार के पद से हटा दिया गया था।
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