विदेश की खबरें | शरणार्थी : कोविड के संक्रमण का जोखिम ज्यादा, टीकाकरण में प्राथमिकता कम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. टोरंटो, दो अगस्त (द कन्वरसेशन) जून में, जी7 ने यह वचन दिया था कि वह कोविड-19 के टीकाकरण से जुड़ी वैश्विक पहल कोवैक्स में 87 करोड़ खुराक का योगदान देगा ताकि 2021 के अंत तक निचले और मध्यम आय वाले देशों में दो अरब टीकाकरण के इसके लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

टोरंटो, दो अगस्त (द कन्वरसेशन) जून में, जी7 ने यह वचन दिया था कि वह कोविड-19 के टीकाकरण से जुड़ी वैश्विक पहल कोवैक्स में 87 करोड़ खुराक का योगदान देगा ताकि 2021 के अंत तक निचले और मध्यम आय वाले देशों में दो अरब टीकाकरण के इसके लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

वैश्विक वैक्सीन-साझाकरण पहल के तहत धन और वैक्सीन को एकत्र किया जा रहा है, जिसे निम्न और मध्यम आय वाले 92 देशों को दे कर उनकी 20 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण करने का लक्ष्य है।

लेकिन एक तरफ जहां उच्च आय वाले देश प्रति 100 लोगों में से 80 से अधिक को टीकाकरण दर के साथ आगे बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ एक संख्या ऐसी है, जो हम सुर्खियों में नहीं देख रहे हैं और वह 1.1 प्रतिशत है।

यह कम आय वाले देशों में कम से कम एक खुराक प्राप्त करने वाले लोगों का प्रतिशत है। विश्व स्तर पर, अब तक 3.83 अरब टीके की खुराक दी जा चुकी है, लेकिन देशों और महाद्वीपों के बीच एक बड़ा वैक्सीन अंतर मौजूद है। अफ्रीका में टीकाकरण दर सबसे कम है।

7.88 अरब की वैश्विक आबादी के साथ, और केवल 27.1 प्रतिशत आबादी को टीका लगाया गया है, इसका मतलब है कि विश्व स्तर पर 5.74 अरब लोगों को टीका नहीं लगाया गया है। और उनमें से अधिकांश लोग दक्षिण अमेरिका, एशिया, ओशिनिया और अफ्रीका में हैं।

महामारी ने शरण चाहने वालों, शरणार्थियों और बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को मुश्किल में छोड़ दिया है - और जब टीकाकरण दरों की बात आती है, तो वे समान रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

विश्व के 86 प्रतिशत शरणार्थी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, इसलिए राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं में उनका समावेश और प्राथमिकता महत्वपूर्ण है।

जैसा कि वर्ल्ड विजन का तर्क है, शरणार्थी ‘‘उच्च जोखिम, कम प्राथमिकता’’ श्रेणी में हैं।

वेनेज़ुएला शरणार्थी संकट दुनिया में सबसे बड़ा है और इसके बढ़ने की भविष्यवाणी की गई है। दक्षिण अमेरिका में इनकी बड़ी संख्या और टीकाकरण की धीमी रफ्तार के कारण वेनेजुएला के शरणार्थियों को कोविड-19 के संक्रमण का बड़ा खतरा है।

2015 से, हिंसा, उत्पीड़न और गरीबी के कारण वेनेजुएला के 56 लाख से अधिक लोग अपने देश को छोड़कर जा चुके हैं। और 2021 के अंत तक 16 लाख और लोगों के विस्थापित होने की संभावना है।

वैश्विक स्तर पर टीके की कमी ने प्रवासियों, शरणार्थियों और शरण चाहने वालों को राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं से बाहर करने में योगदान दिया है।

कोलम्बियाई राष्ट्रपति इवान डुक ने दिसंबर 2020 में घोषणा की कि बिना दस्तावेज वाले वेनेजुएलाई प्रवासियों और शरण चाहने वालों को फरवरी 2021 में अस्थायी सुरक्षा दर्जा देने वाली नयी नीति बनने तक टीके से वंचित रखा जाएगा।

यह अस्थायी स्थिति गैर-दस्तावेज वाले वेनेजुएला के लोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और अंततः टीकाकरण तक पहुंच प्रदान करती है। लेकिन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ते भेदभाव के बीच उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

वेनेजुएला के शरणार्थी ब्राजील भी भाग गए हैं - एक ऐसा देश जो अपनी संघीय टीकाकरण योजना में प्रवासियों, शरण चाहने वालों और शरणार्थियों को प्राथमिकता समूहों के रूप में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं करता है। वैसे कुछ राज्य अपने स्तर पर इन्हें शामिल कर रहे हैं।

ब्राजील में कोविड-19 मामलों की दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी संख्या होने के बावजूद, वेनेजुएलाई अभी भी विभिन्न तरीकों से प्रतिदिन सीमा पार कर रहे हैं।

मैं ब्राज़ील में कोविड-19 हॉटस्पॉट, मनौस में वेनेजुएला के एलजीबीटीक्यूआई+ शरण चाहने वालों और शरणार्थियों पर कोविड-19 के प्रभाव के बारे में शोध कर रहा हूँ।

हमारे शोध के प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि लगभग 40 प्रतिशत उत्तरदाता कोविड-19 से संक्रमित हुए, और तीन को यह दो बार हुआ। (प्रतिभागियों की पहचान की सुरक्षा के लिए नाम बदल दिए गए हैं।)

मार्च से जुलाई 2021 तक, हमारी टीम ने मनौस में 56 वेनेजुएला के एलजीबीटीक्यूआई+ शरण चाहने वालों का सर्वेक्षण किया। केवल छह लोगों को टीका मिला और बाकी को नहीं पता कि उन्हें कब टीका लगाया जाएगा।

और कुछ के लिए तो सवाल यह नहीं है कि टीका कब मिलेगा बल्कि यह है कि मिलेगा भी या नहीं। - शरण चाहने वालों के बीच वैक्सीन लगवाने की हिचकिचाहट भी भूमिका निभा रही है। लगभग 15 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि वे टीकाकरण नहीं करवाएंगे या नहीं करवा सकेंगे।

जोस ने हमें बताया: ‘‘मुझे डर है कि टीका काम नहीं करेगा और मामला और बिगड़ जाएगा।’’

अन्य लोग साइड इफेक्ट के बारे में चिंतित हैं। कई उत्तरदाताओं ने कोविड-19 टीकों और वैक्सीन पहुंच पर सीमित ज्ञान की बात कही। और किम, इस बात को लेकर अनिश्चित है कि क्या वह वैक्सीन के लिए योग्य है क्योंकि टीकाकरण के लिए दस्तावेज़ीकरण आवश्यक है।

महामारी के दौरान एलजीबीटीक्यूआई+ शरण चाहने वालों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव भी बढ़ा - 21 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने हिंसा और/या भेदभाव का सामना करने की जानकारी दी।

एमराल्ड, एक युवा ट्रांस महिला, ने कहा कि उसे पुरुष हमलावरों के एक समूह ने निशाना बनाया, जिन्होंने उसे पीटा और बंदूक की नोक पर लूट लिया। एक अन्य ट्रांस महिला, जेन ने बताया कि काम की तलाश के दौरान उनके साथ भेदभाव किया गया था, उन्होंने कहा कि उन्हें ‘‘ऐसे लोगों से कई बार अस्वीकृति मिली जो चाहते हैं कि हम दूर रहें क्योंकि उन्हें लगता है कि एलजीबीटी महामारी का कारण बना।’’

अन्य को काम पर शोषण और भेदभाव का सामना करना पड़ा क्योंकि वे वेनेज़ुएलाई हैं

वर्ल्ड विजन के हालिया निष्कर्षों का समर्थन करते हुए, हम तर्क देते हैं कि वेनेजुएला के शरण चाहने वाले लोग वास्तव में उच्च जोखिम वाले, कम प्राथमिकता वाले हैं।

अधिकांश दक्षिण अमेरिकी देशों में नीति अथवा व्यवहार में टीकाकरण में प्राथमिकता के बिना लाखों शरण चाहने वाले, शरणार्थी और बिना दस्तावेज वाले प्रवासी संक्रमण और हिंसा की चपेट में आ सकते हैं।

हालांकि एक उम्मीद जगाने वाली बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में कोलंबिया को 35 लाख मॉडर्न वैक्सीन भेजी हैं और इस बात का स्पष्ट अनुरोध किया है कि इनमें से कुछ डोज वेनेजुएला के प्रवासियों और शरणार्थियों को दी जाए।

और कोवैक्स के मानवीय बफर ने ‘‘अंतिम उपाय’’ के रूप में शरणार्थियों और शरण चाहने वालों जैसी कमजोर आबादी के लिए आवेदन प्रक्रिया खोल दी है।

हालांकि, दान की गंभीर कमी, शेड्यूल में देरी और गैर-सरकारी संगठनों के टीकाकरण के कानूनी दायित्व से जुड़ी चिंताओं के बीच, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि मानवीय बफर कितना प्रभावी होगा।

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