ताजा खबरें | मणिपुर मुद्दे पर राज्यसभा की बैठक चार बार बाधित होने के बाद दिन भर के लिए स्थगित
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में सोमवार को मणिपुर के मुद्दे पर सूचीबद्ध अल्पकालिक चर्चा शुरू नहीं हो सकी क्योंकि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सदन में बयान की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी जारी रही जिसके कारण बैठक चार बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
नयी दिल्ली, 31 जुलाई राज्यसभा में सोमवार को मणिपुर के मुद्दे पर सूचीबद्ध अल्पकालिक चर्चा शुरू नहीं हो सकी क्योंकि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सदन में बयान की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी जारी रही जिसके कारण बैठक चार बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
सभापति जगदीप धनखड़ ने जब सदन की बैठक तीसरी बार अपराह्न साढ़े तीन बजे के लिए स्थगित की थी, उससे पहले उन्होंने विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बैठक कर मौजूदा गतिरोध को दूर करने का रास्ता निकालने की घोषणा की थी। हालांकि अपराह्न साढ़े तीन बजे जब बैठक शुरू हुई तब भी सदन में विपक्ष की नारेबाजी जारी रही जिससे संकेत मिलता है कि इस बैठक में गतिरोध दूर करने को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
साढ़े तीन बजे सदन की बैठक शुरू होने पर विपक्षी सदस्य मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। इस पर सभापति धनखड़ ने कहा कि पूरा देश यह सब देख रहा है। उन्होंने सदस्यों से कार्यवाही चलने देने की अपील करते हुए कहा कि उच्च सदन को आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए।
हंगामे के बीच ही संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मणिपुर का मुद्दा गंभीर मुद्दा है जिस पर तत्काल चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की जाती है और सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है तो फिर चर्चा तत्काल शुरू की जानी चाहिए, इसमें विलंब नहीं होना चाहिए।
सभापति ने भी सदस्यों से चर्चा शुरू करने के लिए कहा। लेकिन सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने महज तीन मिनट बाद ही, तीन बजकर 33 मिनट पर बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर, गोवा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित सदस्य सदानंद शेत तलावड़े ने उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली।
सभापति धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत 65 नोटिस मिले हैं।
सभापति ने कहा कि उन्होंने नोटिस देने वाले सदस्यों के नाम और उनके मुद्दों का उल्लेख करने की परिपाटी आरंभ की है। उन्होंने सदस्यों से पूछा कि क्या उन्हें नोटिस देने वाले सभी सदस्यों के नाम पढ़ने चाहिए। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई।
सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार जब मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है तो ऐसे में विपक्षी सदस्य सदन का महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चर्चा से ‘‘भागने’’ का आरोप लगाया।
गोयल ने कहा, ‘‘हम आज ही इस मुद्दे पर चर्चा को तैयार हैं। आप दोपहर दो बजे चर्चा शुरु करें।’’
धनखड़ ने कहा कि वह 20 जुलाई को नियम 176 के तहत मिले नोटिस को स्वीकार कर चुके हैं और सरकार ने चर्चा की हामी भर दी है।
उन्होंने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने का मौका देते हुए पूछा कि क्या वह आज दो बजे चर्चा शुरु करने को तैयार हैं?
खरगे ने कहा, ‘‘हमने नियम 267 के तहत चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं। हम इसी नियम के तहत चर्चा चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सदन में आकर मणिपुर हिंसा पर बयान देना चाहिए।
इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया जिसके चलते सभापति ने 11 बजकर 16 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक पुन: शुरू होने पर सभापति ने सदन में प्रश्नकाल शुरू कराया। इसी दौरान सदन में विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। कुछ सदस्यों ने पूरक सवाल किए और संबंधित मंत्रियों ने उनके जवाब दिए।
इसी दौरान सभापति ने विशेष परिस्थिति का जिक्र करते हुए सदन में नेता प्रतिपक्ष खरगे को अपनी बात रखने के लिए कहा, लेकिन तब तक सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
सदन में व्यवस्था नहीं बनते देख सभापति ने 12 बजकर 18 मिनट पर बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर सभापति धनखड़ ने कहा कि अब सूचीबद्ध कामकाज के तहत सदन में मणिपुर में जातीय हिंसा के मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा करायी जानी है।
उन्होंने असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य को अल्पकालिक चर्चा शुरू करने के लिए आमंत्रित किया। इसी बीच विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य की तथा सत्ता पक्ष के सदस्य मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।
सदन में व्यवस्था बनते न देख सभापति ने दो बजकर 11 मिनट पर बैठक की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक स्थगित कर दी।
दोपहर ढाई बजे बैठक फिर शुरू होने पर सदन में वही नजारा देखने को मिला। विपक्ष के सदस्य प्रधानमंत्री से सदन में आने तथा मणिपुर के मुद्दे पर बयान देने की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे।
सदन में हो रहे हंगामे और नारेबाजी को देखते हुए सभापति ने विभिन्न दलों के नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया ताकि मौजूदा गतिरोध समाप्त हो सके।
धनखड़ ने कहा, ‘‘मेरा कार्यालय कुछ दलों के नेताओं को अपराह्न दो बजकर 45 मिनट पर बैठक करने के लिए नोटिस भेजेगा ताकि (गतिरोध को दूर करने के लिए) कोई रास्ता निकाला जा सके।’’
इसी के साथ उन्होंने बैठक शुरू होने के महज एक मिनट के भीतर अपराह्न साढ़े तीन बजे तक कार्यवाही स्थगित कर दी।
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