देश की खबरें | रेल मंत्री वैष्णव ने कोविड के बाद ट्रेन यात्रियों की संख्या में कमी आने की खबरों को खारिज किया

नयी दिल्ली, 29 नवंबर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि रेल यात्रियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारतीय रेलवे कोविड से पहले के दौर की यात्री संख्या 650 से 700 करोड़ के स्तर को छू लेगा।

मंत्री ने कुछ खबरों और सोशल मीडिया पर आई टिप्पणियों का जोरदार खंडन किया कि रेल यात्रियों की संख्या 2010 की तुलना में आधी हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘कोविड लॉकडाउन के बाद, भारतीय रेलवे ने दिसंबर 2021 से अपनी ट्रेन सेवाएं शुरू कीं और जुलाई 2022 तक परिचालन सामान्य हो गया। वित्त वर्ष 2022-23 में 640 करोड़ लोगों ने ट्रेन नेटवर्क का इस्तेमाल किया।’’

वैष्णव ने कहा, ‘‘इस साल मोटे अनुमान के अनुसार 650 करोड़ लोग (ट्रेन में) यात्रा करेंगे। यह संख्या 750 करोड़ तक जा सकती है। इसलिए हम पूर्व-कोविड युग में वापस पहुंच गए हैं, जब ट्रेन यात्रियों की संख्या लगभग 700 करोड़ हुआ करती थी।’’

उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि गैर-एसी कोच या शयनयान श्रेणी के कोच की संख्या कम कर दी गई है। वैष्णव ने कहा, ‘‘ट्रेन के लगभग 60,000 कोच हैं, जिनमें से 40,000 गैर-एसी हैं, जो एक महत्वपूर्ण संख्या है।’’

हाल में रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि रेलवे ने 2023 में अप्रैल और अक्टूबर के बीच सामान्य और शयनयान श्रेणी के यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की।

इस बीच, वैष्णव ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो अपने रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान कुछ ट्रेन में टक्कर-रोधी प्रणाली शुरू करने की बात करती हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि यह प्रणाली पूरी तरह से विफल हो गई।

वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उनकी अपनी पार्टी के नेता दिनेश त्रिवेदी जी, जो रेल मंत्री बने थे...ने इस प्रणाली को पूरी तरह विफल घोषित कर दिया।’’

उन्होंने कहा कि इस प्रणाली को एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में पेश किया गया था लेकिन जब तक इसका पूरा परीक्षण किया गया, यह एक अल्पविकसित प्रणाली बन गई।

जुलाई 2011 से 2012 तक रेल मंत्री रहे त्रिवेदी ने बाद में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़ दी और 2021 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।

खबरों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने रेल मंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में 2011 की शुरुआत में टक्कर-रोधी प्रणाली के ‘पायलट प्रोजेक्ट’ को मंजूरी दी थी।

दो जून, 2023 को बालासोर ट्रेन दुर्घटना के बाद बनर्जी ने आरोप लगाया था कि अगर ट्रेन में टक्कर-रोधी उपकरण लगाए गए होते, तो त्रासदी टल गई होती। बालासोर में तीन ट्रेन से जुड़ी दुर्घटना में 300 लोगों की मौत हो गई थी।

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