देश की खबरें | पंजाब के राज्यपाल पुरोहित ने जून में विधानसभा के विशेष सत्र को ‘अवैध’ बताया

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चंडीगढ़, 24 जुलाई पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सोमवार को एक और पत्र लिखकर पिछले महीने आहूत दो-दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र को ‘‘स्पष्ट रूप से अवैध’’ करार दिया।

पुरोहित की ओर से मान को यह पत्र एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार लिखा गया है। इससे राज भवन तथा आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है।

राज्यपाल ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मिल रही है और उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि राज्यपाल, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त संवैधानिक प्राधिकारी होता है।

पुरोहित ने यह पत्र तब लिखा, जब दो दिन पहले मान ने कहा था कि यह ‘‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’’ है कि राज्यपाल यह नहीं जानते कि 19-20 जून को बुलाया गया सत्र वैध था या अवैध।

मान के शनिवार को दिए बयान के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि प्रमुख संवैधानिक विशेषज्ञों में से एक से राय ली गयी है। इस राय का सार आपकी जानकारी के लिए संलग्न है, जो साफ तौर पर कहता है कि इस प्रकार से बुलाया गया सत्र स्पष्ट रूप से अवैध था। अब, आपकी टिप्पणियों पर जवाब देने के लिए कुछ बचा नहीं है।’’

इसके साथ ही विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पारित चार विधेयकों का भविष्य अधर में लटक गया है।

मुख्यमंत्री मान को 17 जुलाई को लिखे एक पत्र में पुरोहित ने कहा था कि विधानसभा का सत्र बुलाना संभवतः कानून और कार्य प्रणाली का उल्लंघन है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया था कि वह सदन की बैठक के दौरान पारित विधेयकों पर शीघ्र हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं।

मान द्वारा राज्यपाल से सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक, 2023 पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किये जाने के बाद पुरोहित की यह प्रतिक्रिया आई थी। विधेयक का उद्देश्य अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से 'गुरबानी' का ‘फ्री-टू-एयर’ प्रसारण सुनिश्चित करना है।

यह उन चार विधेयकों में से एक है जिन्हें 19-20 जून को बुलाए गए सत्र में पारित किया गया था। ऐसी दलील दी गयी कि यह सत्र तकनीकी रूप से बजट सत्र का विस्तार था जिसका सत्रावसान नहीं किया गया था। अत: इसके लिए राज्यपाल की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी।

राज्यपाल ने अपने पत्र के साथ कानूनी राय की एक प्रति भी संलग्न की है जिसमें कहा गया है कि सदन की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का अधिकार अध्यक्ष के पास है।

इसमें कहा गया है, ‘‘लेकिन एक बार जब बैठक का कामकाज समाप्त हो जाता है और कुछ भी बचता नहीं है तो बैठक को कृत्रिम रूप से चालू नहीं रखा जा सकता।

कानूनी राय में पंजाब विधानसभा के सचिव के 14 जून के पत्र के हवाले से कहा गया है कि बुलाए गए विशेष सत्र का कामकाज बजट से संबंधित नहीं था और वास्तव में कोई अधूरा एजेंडा नहीं था जिसके लिए बैठक की आवश्यकता हो।

पुरोहित ने कहा, ‘‘विधानसभा में चर्चा के दौरान आपने राज्यपाल पर निशाना साधा जो लोगों को पसंद नहीं आया क्योंकि मुख्यमंत्री की टिप्पणियां उनके पद के अनुरूप नहीं थीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि राज्यपाल के रूप में, मैं भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त संवैधानिक प्राधिकारी हूं और मुझे निष्पक्ष, उचित और ईमानदार प्रशासन सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है और मुझे यह सुनिश्चित करना होता है कि शासन भ्रष्टाचार मुक्त हो।’’

राज्यपाल ने कहा, ‘‘चूंकि मुझे भ्रष्टाचार की कई शिकायतें मिल रही हैं तो मैं आपसे जल्द से जल्द मुझे जवाब देने का अनुरोध करता हूं। अन्यथा इसे संविधान का घोर उल्लंघन माना जाएगा।’’

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