देश की खबरें | पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने राज्य विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया
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चंडीगढ़, 27 सितंबर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया।
राज्य विधानसभा का सत्र आयोजित करने को लेकर राजभवन और आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार के बीच टकराव के बाद रविवार को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने 27 सितंबर को सत्र आहूत करने की अनुमति दी।
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह सांधवान ने जब घोषणा की कि मुख्यमंत्री विश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो विधायकों अश्विनी शर्मा और जंगी लाल महाजन ने सदन से बर्हिमन किया।
सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद मान ने कांग्रेस पर भाजपा के ‘‘ऑपरेशन लोटस’’ का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके विधायक सदन में चर्चा में हिस्सा नहीं लेते हैं। उन्होंने राजस्थान में राजनीतिक संकट को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसी स्थिति में है कि कोई भी पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनना चाहता है। राजस्थान में अशोक गहलोत के विश्वस्त विधायकों ने पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों से मुलाकात नहीं की।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का मानना है हर जगह उसे ही सत्ता में होना चाहिए। मान ने कहा, ‘‘पंजाब के तीन करोड़ लोगों ने हम पर भरोसा जताया है... मुझे अपने 91 सिपाहियों (आप विधायकों) पर पूरा भरोसा है।’’
आप ने हाल में दावा किया था कि उसके कम से कम 10 विधायकों से संपर्क किया गया और भाजपा ने अपने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत छह महीने पहले बनी राज्य सरकार को गिराने के लिए उन्हें 25-25 करोड़ रुपये देने की पेशकश की।
117 सदस्यीय विधानसभा में आप के 92 विधायक, कांग्रेस के 18, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के तीन, भाजपा के दो, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का एक और एक निर्दलीय विधायक है।
इससे पहले, विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के कुछ विधायकों का नाम लिया और उन्हें बार-बार सदन के कामकाज में व्यवधान नहीं डालने को कहा और इसके कारण दो बार कुछ देर के लिए सदन को स्थगित करना पड़ा।
हालांकि, दूसरी बार सदन स्थगित होने के बाद फिर से कार्यवाही शुरू होने पर जब कांग्रेस विधायक सदन से नहीं गए तो विधानसभा अध्यक्ष ने मार्शलों को उन्हें बाहर ले जाने का निर्देश दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी आदेश दिया कि कांग्रेस विधायक मंगलवार को सदन की शेष कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे।
पुरोहित ने 27 सितंबर को सत्र आहूत करने के राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। राज्य सरकार ने उन्हें सूचित किया था कि वह विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान पराली जलाने, माल एवं सेवा कर तथा बिजली आपूर्ति के मुद्दों पर चर्चा करेगी।
21 सितंबर को राज्यपाल ने पंजाब विधानसभा के 22 सितंबर को विशेष सत्र आहूत किए जाने को अनुमति नहीं दी थी क्योंकि आप के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बताया था कि वह विश्वास प्रस्ताव पेश करना चाहती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आप सरकार के सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करने के कदम पर सवाल उठाया। बाजवा ने कहा कि पंजाब विधानसभा के नियम में कहीं भी जिक्र नहीं है कि सत्तारूढ़ पार्टी विश्वास प्रस्ताव ला सकती है।
बाजवा ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि सदन की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में जब उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के बारे में पूछा तो कोई जवाब नहीं दिया गया।
उन्होंने पुरोहित द्वारा विश्वास प्रस्ताव लाए जाने की अनुमति नहीं दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा, इसका मतलब है कि संवैधानिक प्रमुख (पंजाब के राज्यपाल) के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया गया।
बाजवा ने कहा देखा जाए तो आपने राज्यपाल की शक्तियों को चुनौती दी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसकी निंदा करता हूं।’’
सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद कांग्रेस सदस्यों ने जानना चाहा कि क्या शून्य काल आयोजित किया जाएगा या नहीं क्योंकि उन्हें कुछ निश्चित मुद्दों पर चर्चा करनी है। जब मान और मंत्री अमन अरोड़ा बोलने के लिए उठे तो कांग्रेस सदस्यों ने बार-बार व्यवधान डाला।
विधानसभा अध्यक्ष ने इसके बाद कहा कि वे नारे नहीं लगाएं और सदन के बीचों बीच नहीं आएं। मान ने भी कांग्रेस विधायकों पर बरसते हुए कहा कि ‘‘जो हमें कानून का पाठ पढ़ाना चाहते हैं, उन्हें पहले अपना घर संभालना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा में वे अपना घर नहीं संभाल सके। आप यहां किसी भी बात पर बहस नहीं होने देते और बाहर आप मांग करते हैं कि सदन की अवधि लंबी होनी चाहिए।’’
मान ने विपक्ष के नेता से कहा, ‘‘श्रीमान बाजवा इसका मतलब है कि ‘ऑपरेशन लोटस’ के नाकाम होने से आपको कुछ नुकसान हो रहा है।’’
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अरोड़ा ने कहा कि कांग्रेस हमारा विरोध करने के लिए भाजपा की ‘‘बी टीम’’ की तरह काम कर रही है।
पंजाब में आप के नेतृत्व वाली सरकार ने भाजपा पर उसकी सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। इसके कुछ दिन बाद उसने विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 22 सितंबर को विशेष सत्र के आयोजन की मांग की थी।
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