विदेश की खबरें | शहबाज ने यदि प्रधानमंत्री का चुनाव लड़ा तो ‘पीटीआई’ के सांसद देंगे इस्तीफा: चौधरी

इस्लामाबाद, 10 अप्रैल पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने रविवार को घोषणा की कि अगर विपक्षी उम्मीदवार शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद का चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई तो पार्टी के सांसद सोमवार को इस्तीफा दे देंगे।

यह घोषणा पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने खान की अध्यक्षता में पीटीआई की कोर कमेटी की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा, ‘‘अगर शहबाज शरीफ के (नामांकन) पत्रों पर हमारी आपत्ति का समाधान नहीं किया गया, तो हम कल इस्तीफा दे देंगे।’’

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज ने रविवार को खुद को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया।

खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने के बाद सदन के नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया रविवार को शुरू हुई। शहबाज के सोमवार को नेशनल असेंबली में खान के उत्तराधिकारी के रूप में चुने जाने की संभावना है। नया प्रधानमंत्री बनने के लिए 342 सदस्यीय सदन में 172 मतों की आवश्यकता होगी।

चौधरी ने यह भी कहा कि पीटीआई ने पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को शहबाज के खिलाफ मैदान में उतारा है ताकि पार्टी संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदवारी को चुनौती दे सके। उन्होंने कहा कि शहबाज उसी दिन प्रधानमंत्री का चुनाव लड़ेंगे, जब उन्हें धनशोधन के एक मामले में आरोपित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के लिए इससे ज्यादा अपमानजनक और क्या हो सकता है कि उस पर एक विदेश से चुनी हुई और आयातित सरकार थोपी जाए और शहबाज जैसे व्यक्ति को उसका मुखिया बना दिया जाए।’’

चौधरी का इशारा परोक्ष तौर पर संघीय जांच एजेंसी की एक विशेष अदालत के फैसले की ओर था, जिसने 11 अप्रैल को 14 अरब रुपये के धनशोधन मामले में शहबाज और उनके बेटे हमजा को आरोपित करने की घोषणा की थी।

इस बीच, पीटीआई की आपत्तियों को नेशनल असेंबली सचिवालय ने खारिज कर दिया, जिससे शहबाज और उनके प्रतिद्वंद्वी कुरैशी को चुनाव लड़ने के लिए हरी झंडी मिल गई।

चौधरी ने यह भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव एक साजिश थी। उन्होंने पीटीआई के समर्थकों से खान के लिए अपना समर्थन दिखाने के लिए रविवार रात की नमाज के बाद हर जिले में विरोध प्रदर्शन करने को कहा।

चौधरी ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय द्वारा देर रात अपने दरवाजे खोलने के फैसले पर भी आपत्ति जताई।

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