देश की खबरें | पीटीआई तथ्यान्वेषण: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए डब्ल्यूईएफ ने नहीं दिया कम नहाने का आदेश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लोगों को सप्ताह में एक बार या कम नहाने के लिए कहा है! हाल में कई ट्विटर पोस्ट में यह दावा किया गया था, हालांकि ‘पीटीआई-भाषा’ की तथ्यान्वेषी टीम ने इस दावे को गलत पाया है।

नयी दिल्ली, छह जनवरी विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लोगों को सप्ताह में एक बार या कम नहाने के लिए कहा है! हाल में कई ट्विटर पोस्ट में यह दावा किया गया था, हालांकि ‘पीटीआई-’ की तथ्यान्वेषी टीम ने इस दावे को गलत पाया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक खबर का स्क्रीनशॉट साझा किया जा रहा था, जिसकी सुर्खी थी "धरती को बचाने के लिए डब्ल्यूईएफ लोगों से कहा, सप्ताह में एक बार या कम नहाएं"। हालांकि तथ्यान्वेषण में पाया गया कि डब्ल्यूईएफ ने न तो ऐसा कोई बयान जारी किया है और न ही ट्विटर पर कोई पोस्ट की है।

तथ्यान्वेषण टीम ने अपनी पड़ताल के पहले चरण में पिछले साल 29 दिसंबर को यूजर द्वारा ट्वीट किए गए लेख को देखा। यह लेख न्यूज पंच नाम की एक वेबसाइट ने उसी दिन प्रकाशित किया था। लेख में डब्ल्यूईएफ या किसी एजेंसी के अधिकारी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया था।

टीम ने अपनी जांच के अगले चरण में, संगठन की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल को खंगाला, लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं मिली। अगर डब्ल्यूईएफ ने ऐसी कोई घोषणा की होती, तो यह देश भर में सुर्खियां बटोरता।

डब्ल्यूईएफ की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2021 में जल संकट को जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारणों में से एक बताया गया है।

‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ग्लोबल रिस्क परसेप्शन सर्वे 2020’ पर आधारित रिपोर्ट में दुनिया भर में प्राकृतिक संसाधनों के मानवीय अतिदोहन और महत्वपूर्ण कुप्रबंधन के कारण पैदा होने वाले रासायनिक, खाद्य, खनिज व जल संकट को वैश्विक स्तर पर सबसे ऊपर रखा गया है।

रिपोर्ट में कहीं भी डब्ल्यूईएफ ने पानी या जलवायु को बचाने के लिए लोगों को कम नहाने का सुझाव नहीं दिया है।

पाठक व्हाट्सएप नंबर +91-8130503759 पर पीटीआई फैक्ट चेक टीम से संपर्क करके ऐसे किसी दावे या सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं, जिसका उन्हें लगता है कि तथ्यान्वेषण होना चाहिए।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now