देश की खबरें | पीटीआई फैक्ट चैक: वैज्ञानिकों ने आर्कटिक सागर में हिमस्तर बढ़ने संबंधी रिपोर्ट को भ्रामक बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित वह रिपोर्ट भ्रामक है, जिसमें दावा किया गया है कि आर्कटिक सागर में हिम स्तर बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन हकीकत नहीं है।
नयी दिल्ली, 16 जून वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित वह रिपोर्ट भ्रामक है, जिसमें दावा किया गया है कि आर्कटिक सागर में हिम स्तर बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन हकीकत नहीं है।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक आंकड़ों का इस्तेमाल करके जलवायु रूझानों का आकलन किया जा सकता है न कि केवल वार्षिक रिपोर्टों के आधार पर।
यूरोपीय संघ के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम 'कॉपरनिकस' के आंकड़ों पर आधारित 'द डेली स्केपटिक' में प्रकाशित रिपोर्ट फेसबुक और सोशल मीडिया जैसे सोशल मीडिया मंचों पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रही है। इस पोस्ट को 4,300 से ज्यादा बार पसंद किया जा चुका है और 2 हजार से अधिक बार रिट्वीट किया जा चुका है।
लेख में कहा गया है, ''आर्कटिक में हिम का स्तर बढ़ रहा है। यह 1991 से 2020 के बीच के औसत स्तर के काफी करीब है। यह 2012 के निम्न स्तर से काफी ऊपर और 2020 के स्तर से काफी अधिक है। यहां किसी भी चिंताजनक प्रलय का कोई संकेत नहीं मिला है। ''
हाल में रिपोर्ट का यह पैरा ट्वीट किया गया, जो वायरल हो गया और विभिन्न वर्गों में इसपर चर्चा शुरू हो गई।
आंकड़ों पर आधारित लेख में निष्कर्ष निकाला गया है, ''[आर्कटिक समुद्री हिम] अब 1991-2020 के औसत के बहुत करीब है, जो 2012 के निम्न बिंदु से ऊपर और 2020 से अधिक है। यूरोपीय संघ के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम कॉपरनिकस के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 में समुद्री हिम की सीमा 30 साल के औसत से सिर्फ 3% कम थी।''
इस लेख के बारे में 'पीटीआई-' ने जिन वैज्ञानिकों से बात की, उन्होंने इस बात से सहमति जतायी कि कॉपरनिकस के आंकड़े ठीक लगते हैं, लेकिन वेबसाइट ने जो निष्कर्ष निकाला है, वह भ्रामक है।
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