देश की खबरें | भारतीय न्याय संहित विधेयक में छोटे अपराध के लिए दंडस्वरूप सामुदायिक सेवा का प्रावधान
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में भारतीय दंड संहिता को बदलने के लिए भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 पेश किया, जिसमें मानहानि, शराब पीने के बाद दुर्व्यवहार करने जैसे अपराध के लिए दंड स्वरूप सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
नयी दिल्ली, 11 अगस्त गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में भारतीय दंड संहिता को बदलने के लिए भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 पेश किया, जिसमें मानहानि, शराब पीने के बाद दुर्व्यवहार करने जैसे अपराध के लिए दंड स्वरूप सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
शाह ने निचले सदन में तीन विधेयक पेश किया, जो औपनिवेशिक काल के तीन कानूनों की जगह लेंगे। इनमें भारतीय दंड संहिता, 1860, दंड प्रक्रिया संहिता
1898 और भारतीय साक्ष्य संहिता 1872 शामिल है। इन विधेयकों में भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 शामिल हैं।
भारतीय अदालतों में मामूली अपराध के दोषियों को पौधारोपण, धार्मिक स्थलों एवं आश्रय स्थलों पर सेवा आदि करने के आदेश के बाद छोड़ दिया जाता है, लेकिन भारतीय न्याय संहिता विधेयक में छोटे अपराध के संदर्भ में सामुदायिक सेवा का प्रावधान शामिल किया गया है।
विधेयक में मानहानि, लोक सेवकों के गैर कानूनी रूप से कारोबार करने,कानूनी शक्ति के अनुपालन को रोकने जैसे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा को दंड के एक प्रकार में शामिल किया गया है।
भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक मानहानि के मामले में साधारण कारावास से लेकर दो वर्ष की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है, लेकिन इस विधेयक में मानहानि के मामले में साधारण कारावास से लेकर दो वर्ष की कैद या जुर्माना या दोनों या सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
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