जरुरी जानकारी | चाय, दवा, मसालों के लिए निर्यात दायित्व अवधि में संशोधन का प्रस्ताव

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नयी दिल्ली, 18 जून वाणिज्य मंत्रालय की इकाई डीजीएफटी ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मसालों, दवाओं और चाय जैसे क्षेत्रों के लिए निर्यात दायित्व अवधि में संशोधन करने का मंगलवार को प्रस्ताव रखा।

सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों पर 15 दिन के भीतर सभी संबंधित हितधारकों से टिप्पणियां मांगी हैं।

सरकार उन्नत प्राधिकार योजना के तहत केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए माल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देती है, जो निर्यात दायित्व अवधि के अधीन है।

इस अवधि के तहत निर्यातकों को निर्धारित समय के भीतर माल भेजना होता है और ऐसा न करने पर उनपर जुर्माना लगाया जाता है।

प्रस्तावित संशोधनों की सूची में गेहूं, कच्ची चीनी, प्राकृतिक रबड़, मक्का और अखरोट शामिल हैं। भारत में फिलहाल गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध है।

डीजीएफटी ने मसालों (12 महीने), नारियल तेल (90 दिनों से छह माह), किसी भी रूप में रेशम (नौ से 12 महीने), गेहूं (छह माह), कच्ची चीनी (छह माह), प्राकृतिक रबड़ (12 महीने), मक्का (छह माह) और अखरोट (छह माह) के लिए दायित्व अवधि में ढील देने की बात कही है।

निर्यात दायित्व अवधि में संशोधन के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने विदेश व्यापार नीति की प्रक्रिया पुस्तिका 2023 के परिशिष्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा है। इस परिशिष्ट में क्षेत्रों और उनके संबंधित निर्यात दायित्व अवधि के बारे में बताया गया है।

डीजीएफटी ने कहा कि इस परिशिष्ट की समीक्षा के संबंध में निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और निर्यातकों की ओर से कई अनुरोध मिले हैं।

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