देश की खबरें | कावेरी मुद्दे पर 'मौजूदा हालात' कांग्रेस और द्रमुक की मिलीभगत के कारण : येदियुरप्पा

बेंगलुरु, 21 सितंबर कावेरी मुद्दे को लेकर सिद्धरमैया नीत कांग्रेस सरकार पर 'विफलता' का आरोप लगाते हुए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार से उच्चतम न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का आग्रह किया।

देश की शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में पानी छोड़ने के आदेश में हस्तक्षेप करने से आज (बृहस्पतिवार) इनकार कर दिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने यह टिप्पणी की।

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) और कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा कर्नाटक को पांच हजार क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने के निर्देश में हस्पतक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर हमला बोला।

कर्नाटक अपने रुख पर अडिग है कि वह पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है। दरअसल पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने की वजह से पानी की कमी है और पीने के पानी की खुद की जरूरत को पूरा करने व कावेरी नदीघाटी इलाकों में खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए पहले से राज्य पानी की कमी से जूझ रहा है।

येदियुरप्पा ने कहा, “हमारे (कर्नाटक) द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के आधार पर उच्चतम न्यायालय ने अपना आदेश दिया। कानून व जल संसाधन विभाग प्रभावी रूप से अपना तर्क रखने में पूर्ण रूप से विफल साबित हुए। बृहस्पतिवार को जारी शीर्ष अदालत के आदेश से यह साबित होता है कि सरकार बिना उचित तैयारी किए अदालत गई और उचित दस्तावेज मुहैया कराने में विफल रही।''

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुद्दे पर केंद्र सरकार को बेवजह घसीटने का प्रयास करने के बजाए राज्य सरकार को तमिलनाडु से बात करनी चाहिए, जहां कांग्रेस की सहयोगी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) सत्ता में है।

उन्होंने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री से उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपील दाखिल करने का आग्रह करता हूं ताकि जमीनी हकीकत उनके संज्ञान में लाई जा सके। शीर्ष अदालत को एक दल भेजने दीजिए, जो यहां जलाशयों में जलस्तर का आकलन करे और उसके आधार पर वे जो भी आदेश देंगे हम उसे मानने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार को इसके लिए अपील करनी चाहिए।''

सीडब्ल्यूएमए ने सोमवार को अगले 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को पांच हजार क्यूसेक पानी देना जारी रखने को कहा था। इस तरह की सिफारिश पिछले सप्ताह सीडब्ल्यूआरसी ने भी की थी।

राज्य सरकार पर कावेरी मुद्दे की गंभीरता को समझने में विफल रहने और इसे नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए बोम्मई ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द सतर्क हो जाना चाहिए था क्योंकि मानसून में बारिश कम हुई लेकिन उनकी नींद सीडब्ल्यूएमए का आदेश आने के बाद टूटी।

उच्चतम न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी सुनिश्चित करने के एकमात्र विकल्प पर उन्होंने कहा कि भाजपा कावेरी मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहती है लेकिन असल बात यह है कि सरकार इस मुद्दे पर विफल साबित हो चुकी है।

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