ताजा खबरें | डाक घर विधेयक चर्चा तीन रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने कहा कि आधुनिकीकरण के नाम पर, प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के नाम पर डाक विभाग का निजीकरण की राह नहीं बनानी चाहिए।
आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने कहा कि आधुनिकीकरण के नाम पर, प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के नाम पर डाक विभाग का निजीकरण की राह नहीं बनानी चाहिए।
भाजपा के लहर सिंह सिरोया ने कहा कि बदलती परिस्थितियों ने डाक विभाग को भी अप्रासंगिक बना दिया था लेकिन अब इसमें सुधार की कोशिश की जा रही है जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अब कई तरह की नयी चीजों को डाक विभाग से जोड़ा गया है और इसकी उपयोगिता कई गुना अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा ‘‘यह संशोधन विधेयक इसी दिशा में एक कदम है।’’
विपक्ष द्वारा विधेयक की आलोचना किए जाने को उन्होंने ‘‘विपक्ष की प्रवृत्ति’’ करार देते हुए कहा कि गांवों में पोस्ट ऑफिस आज भी प्रासंगिक हैं जिसे देखते हुए इन्हें आधुनिक बनाया जाना जरूरी है।
अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम थंबीदुरै ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक तो बहुत पहले लाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह सच है कि आज इंटरनेट और ई मेल का जमाना है लेकिन गांवों में कितने लोग इस प्रौद्योगिकी के जानकार हैं। उनके लिए तो डाक व्यवस्था आज भी महत्वपूर्ण है।
भाकपा के संदोष कुमार पी ने कहा कि अधिकारियों को डाक की जांच करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
भाजपा के डॉ अनिल सुखदेवराव बोंडे ने कहा कि 1858 में बनाया गया डाक अधिनियम आज नए रूप में आ रहा है जो निश्चित रूप से गरीबों के लिए, युवाओं के लिए, किसानों के लिए और महिलाओं के बहुत उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि डाकघरों को जिस प्रकार नागरिक केंद्रित बनाया जा रहा है, उससे निश्चित रूप से इन वर्गों का सशक्तीकरण होगा ओर उनका आत्मसम्मान बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि ‘‘आर डी डाकघर के माध्यम से होता है। इसका फायदा उद्योगपतियों को नहीं बल्कि सबसे निचले समूहों को होता है। यह डाक घर की ही उपयोगिता है। आज तो स्मार्ट डाक घर पूरी तरह आधुनिक हो चुके हैं और इसका फायदा आम लोगों को ही होगा। उम्मीद है कि आने वाले कल में अमेजॅन प्लेटफार्म की तरह हमारे डाकघर भी काम करने लगें।’’
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा ‘‘विधेयक में सुधार के नाम पर ऐसे उपबंध डाले गए हैं जो सुरक्षा की दृष्टि से बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। ये उपबंध निगरानी करने की अनुमति देते हैं, भले ही कारण अलग अलग हों। आज आपातकाल की आड़ में पूरी तरह निगरानी की जा सकती है।’’
उन्होंने कहा ‘‘महानिदेशक को, उनके अधिकारियों को डाक खोलने के लिए पूरी छूट दी जा रही है और जवाबदेही का अभाव है। किसी न किसी बहाने से विपक्ष को दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए, यह लोकतंत्र के खिलाफ है।’’
उन्होंने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधानों पर निश्चित रूप से पुन:विचार किया जाना चाहिए।
जारी
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)