देश की खबरें | कश्मीर में हत्याओं के मुद्दे पर राजनीतिक दलों ने भाजपा के खिलाफ किया प्रदर्शन

जम्मू, 14 मई जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने घाटी में आतंकवादियों द्वारा की जा रही हत्याओं के मुद्दे पर शनिवार को भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडित व सरकारी कर्मचारी राहुल भट की बडगाम के चदूरा में और विशेष पुलिस अधिकारी रियाज अहमद ठोकर की पुलवामा में क्रमश: बृहस्पतिवार और शुक्रवार को आतंकवादियों ने हत्या कर दी।

अधिकारियों ने बताया कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस के सदस्य क्रमश: शहीदी चौक और गांधी नगर इलाके स्थित अपने-अपने पार्टी मुख्यालयों से बाहर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने प्रेस क्लब के नजदीक प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी बाद में शांतिपूर्ण तरीके से चले गए।

पीडीपी के उपाध्यक्ष चौधरी अब्दुल हमीद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम यह प्रदर्शन भट और एसपीओ की आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या की निंदा करने के लिए कर रहे हैं। अब और पहले हमेशा कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं क्योंकि सरकार लोगों को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह से असफल रही है।’’

उन्होंने हत्याओं की उच्च स्तरीय जांच कराने और मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआजवा देने की मांग की।

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमिटी (जेकेपीसीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर आतंकवाद का समर्थन जारी रखने के लिए पाकिस्तान की निंदा की।

पार्टी सदस्यों ने साथ ही भाजपा नीत केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह घाटी में बेगुनाह लोगों की खासतौर पर कश्मीरी पंडितों और गैर स्थानीय लोगों की लक्षित हत्याओं को रोकने में कथित तौर पर असफल रही है।

भल्ला ने कहा, ‘‘ हम कड़े शब्दों में उच्च सुरक्षा वाले तहसील परिसर में भट की नृशंस हत्या की निंदा करते हैं। केंद्र कश्मीर में अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में पूरी तरह से असफल रही है और लक्षित हत्याएं लगातार हो रही हैं।’’

वरिष्ठ आप नेता और पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने कहा कि भाजपा की ‘‘ नामसमझ और गलत नीतियों’’ का नतीजा है कि लागातार खूनखराबा और मार-काट हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ लोकप्रिय सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद लगभग खत्म हो गया था। लेकिन मौजूदा शासकों द्वारा अंधाधुंध किए गए प्रयोग का नतीजा है कि सुरक्षा की स्थिति में लगातार गिरावट आई। राज्य में 1990 के शुरुआत जैसी स्थिति पैदा हो रही है।’’

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