देश की खबरें | मोदी के बयान पर पीएमओ की सफाई : वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री से कहा कि पहले मन बना लें

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नयी दिल्ली, 20 जून वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पीएमओ की तरफ से जारी स्पष्टीकरण को लेकर शनिवार को मोदी पर प्रहार करते हुए कहा कि बोलने से पहले वह अपना ‘‘मन बना लें’’ और गंभीर मुद्दों पर ‘‘दुविधा’’ में रहना बंद करें। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि भारतीय क्षेत्र में कोई नहीं घुसा।

सर्वदलीय बैठक में मोदी के बयान को लेकर हो रही आलोचना को पीएमओ ने ‘‘शरारतपूर्ण व्याख्या’’ बताया। मोदी ने पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा था कि कोई भी भारतीय क्षेत्र में नहीं घुसा है या किसी सैन्य चौकी पर कब्जा नहीं किया है।

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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बयान जारी कर कहा कि शुक्रवार की बैठक में मोदी के बयान का मुख्य बिंदु 15 जून को गलवान में हुई घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में था जिसके कारण 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी को पहले निश्चय कर लेना चाहिए और फिर बोलना चाहिए अन्यथा उनका प्रयास सभी राजनीतिक दलों को गुमराह करना और कूटनीतिक वार्ता में हमारे रूख को कमजोर करना था। या तो प्रधानमंत्री ने कल शाम सर्वदलीय बैठक में जो कहा, वैसा उनके कहने का मतलब नहीं था। अगर वह इतनी तेजी से अपने बयान बदलते हैं तो इस तरह के सामरिक महत्व के मुद्दे पर उन्होंने जो कहा उस पर हमें विश्वास करना चाहिए?’’

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येचुरी ने कहा, ‘‘श्रीमान मोदी हमारे सैनिकों की शहादत वोट बैंक की राजनीति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।’’

माकपा और भाकपा दोनों ने कहा कि स्पष्टीकरण से जवाब मिलने के बजाय ज्यादा सवाल खड़े हो गए और जानना चाहा कि देश के नेता इस तरह के गंभीर मुद्दे को कैसे उलझा रहे हैं।

भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री से सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि इस तरह के गंभीर मुद्दे पर वह इतनी दुविधा में कैसे हो सकते हैं कि उनके कार्यालय द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने की जरूरत है? कल सर्वदलीय बैठक में उन्होंने एक बात कही और अब वे स्पष्टीकरण दे रहे हैं कि यह सही बयान है। यह उच्चस्तरीय बैठक थी। इस तरह की बैठक में वह कैसे स्पष्ट नहीं हो सकते हैं? किस पर विश्वास करना चाहिए? इससे और सवाल उठते हैं।’’

कांग्रेस के साथ ही सामरिक मामलों के कई विशेषज्ञों ने शुक्रवार को मोदी के बयान पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि गलवान घाटी में अगर चीनी सैनिकों ने घुसपैठ नहीं की थी तो भारतीय सैनिक कहां मरे थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि क्या मोदी ने गतिरोध पर चीन को क्लीनचिट दे दी।

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