देश की खबरें | कोविड-19 से मरने वाले पारसी लोगों की परंपरागत अंत्येष्टि की मांग करने वाली याचिका खारिज
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अहमदाबाद, 23 जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सूरत पारसी पंचायत बोर्ड की वह याचिका खारिज कर दी, जिसके जरिए उसने कोविड-19 से मरने वाले समुदाय के सदस्यों का दाह संस्कार करने के बजाय पारसी परंपरा के मुताबिक अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांगी थी।
न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और न्यायमूर्ति भार्गव डी कारिया की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है और उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के बारे में उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई हालिया टिप्पणी का हवाला दिया।
सूरत पारसी पंचायत बोर्ड ने मई में दायर की गई अपनी याचिका के जरिए कोविड-19 से मरने वाले समुदाय के सदस्यों का अंतिम संस्कार दोखामांसिनी के जरिए करने के मूल अधिकार का संरक्षण किये जाने का अनुरोध किया था।
याचिका में कहा गया है कि दोखामांसिनी परंपरा में शव को ‘टावर ऑफ साइलेंस’ कहे जाने वाले एक ढांचे में ऊंचाई पर रख दिया जाता है ताकि गिद्ध उन्हें खा सके और अवशेषों को धूप में सड़ने-गलने के लिए छोड़ दिया जाता है।
न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा, ‘‘राज्य की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च कानून है। कांवड़ यात्रा मुद्दे में उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन का उनका अधिकार सर्वोपरि है तथा अन्य सभी भावनाएं इस मूल अधिकार से कम महत्व के हैं।’’
न्यायालय ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और यह खारिज की जाती है।
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