ताजा खबरें | संसद ने दी अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक को मंजूरी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद ने बुधवार को एक अहम विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश भर के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्तपोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिष्ठान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

नयी दिल्ली, नौ अगस्त संसद ने बुधवार को एक अहम विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश भर के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्तपोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिष्ठान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

राज्यसभा ने बुधवार को संक्षिप्त चर्चा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023 को ध्वनिमत से मंजूरी दी। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

सदन में जब इस विधेयक पर चर्चा हो रही थी तो विपक्षी सदस्य मौजूद नहीं थे। मणिपुर मुद्दे पर चर्चा और प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से पहले ही बहिर्गमन कर दिया था।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सिंह ने विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से एक इतिहास का निर्माण होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, उन्होंने कई महत्पूर्ण निर्णय लिये हैं।

उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र, परमाणु ऊर्जा, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मोदी सरकार के विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किया।

सिंह ने कहा कि सदन आज जिस विधेयक को पारित करने जा रहा है, वह 2047 में भारत का कद एवं चेहरा परिभाषित करेगा और उसके लिए मार्ग प्रशस्त करेगा ‘‘क्योंकि यह हमें विकसित देशों के समूह में खड़ा कर देगा।’’

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लाये जाने से पहले सरकार ने दो-तीन साल विभिन्न मुद्दों का अध्ययन किया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस संस्था की खातिर कुल 50 हजार करोड़ रुपये का बजट पांच साल के लिए रखा गया है। इसमें 36 हजार करोड़ रुपये उद्योग जगत के माध्यम और अन्य साधनों से एकत्र किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों की मदद से राज्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान कार्यों के वित्त पोषण में मदद मिलेगी।

सिंह ने कहा कि यह विधेयक बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था किंतु शायद नियति को यही मंजूर था कि इसे तब लाया गया जब देश के प्रधानमंत्री मोदी हैं।

विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने कहा कि विभिन्न देशों की तुलना में भारत में अनुसंधान पर बहुत कम व्यय किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र 0.7 प्रतिशत इस क्षेत्र में खर्च किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को अनुसंधान कार्य के लिए आईआईटी एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अलावा राज्य विश्वविद्यालयों को भी अधिक पैसा देना चाहिए।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अयोध्या रामी रेड्डी आला ने कहा कि यह विधेयक देश में अनुसंधान एवं उद्यमिता के क्षेत्र को एक नयी दिशा देगा। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विकसित देश बनना है तो अनुसंधान एवं हमारी जरूरतों के अनुसार अभिनव प्रयास करने होंगे।

विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए तेलुगु देशम पार्टी के कनकमेदला रवीद्र कुमार, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वी विजय साई रेड्डी, तमिल मनीला कांग्रेस (एम) के जी के वासन, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने कहा कि इससे अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि यह विधेयक अनुसंधान और विकास, वैज्ञानिक खोजों, नयी प्रौद्योगिकियों और अभिनव अनुप्रयोगों की आधारशिला है। प्रतिस्पर्धा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सफलता और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में चुनौतियों और अवसरों का समाधान करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसमें कहा गया है कि विज्ञान के सभी क्षेत्रों में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का विकास आवश्यक है। इसमें गणितीय विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और कृषि के साथ ही मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक और तकनीकी आयाम सम्मिलित हैं।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम अनुसंधान और नवाचार के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण के जरिये एकीकृत योजना और समन्वय की आवश्यकता है। इसके अनुसार देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित मानव संसाधनों का एक विशाल समूह है जिनमें से कई लोग भारत के बाहर के विश्वविद्यालय और संस्थाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान के अवसर तलाश सकते हैं।

इसका मकसद वित्तीय रूप से व्यावहारिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करने के लिए निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों का दोहन करना भी है। प्रस्तावित नए विधान का उद्देश्य वैज्ञानिक खोज के लिए भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान और ज्ञान उद्यमिता और नवाचार क्षमता को बढ़ाना है।

इसमें कहा गया है कि ‘अनुसंधान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान विधेयक 2023’ का मकसद एक बहुत ही जीवंत एवं विश्वस्तरीय सक्षम वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र का सृजन करना है। विधेयक के उपबंध 3 और 4 में अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान की स्थापना का उपबंध किया गया है।

विधेयक में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले प्रतिष्ठान के प्रशासनिक बोर्ड की संरचना का भी उल्लेख किया गया है। राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के संचालक मंडल में प्रतिष्ठित शोधार्थी और पेशेवर शामिल होने की बात कही गई है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\