देश की खबरें | पूर्व विधि सचिव विश्वनाथन की अध्यक्षता वाले पैनल ने मध्यस्थता सुधारों पर रिपोर्ट सौंपी

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नयी दिल्ली, 14 फरवरी पूर्व विधि सचिव टी के विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति ने मध्यस्थता क्षेत्र में सुधारों पर अपनी रिपोर्ट कानून मंत्रालय को सौंप दी है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि इस समिति में कानून मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मध्यस्थता क्षेत्र के विशेषज्ञ भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि समिति ने मध्यस्थता कानून में संशोधन की सिफारिश की है ताकि अदालत को मध्यस्थता संबंधी फैसलों को दरकिनार करने या बदलने की शक्ति प्रदान की जा सके।

विधि जगत के प्रतिनिधियों ने कानून में प्रस्तावित बदलावों को देश में मध्यस्थता संबंधी सुधारों के लिए झटका बताया है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता क्षेत्र के लिए चिंताजनक प्रमुख मुद्दों में से एक मुद्दा मध्यस्थों द्वारा लिया जाने वाला अत्यधिक शुल्क है।

सुधारों में शुल्क अनुसूची से संबंधित चौथी अनुसूची को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।

उन्होंने कहा कि समिति ने एक मध्यस्थ द्वारा लिए जाने वाले मध्यस्थता संबंधी निर्णयों की संख्या पर भी कोई सीमा तय नहीं की है। उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि मध्यस्थ के रूप में नियुक्ति के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

समिति को मध्यस्थता अधिनियम की कार्यप्रणाली समेत देश के वर्तमान मध्यस्थता पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन के आकलन और विश्लेषण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति को ऐसी आदर्श मध्यस्थता प्रणाली की एक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए भी कहा गया था जो कुशल, प्रभावी एवं किफायती हो और उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करती हो।

मध्यस्थता प्रणाली के तहत संबंधित पक्ष अदालतों का दरवाजा खटखटाने के बजाय मध्यस्थों के माध्यम से निजी विवाद समाधान का विकल्प चुनते हैं। मध्यस्थों का निर्णय बाध्यकारी है।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने एक दीवानी अपील पर सुनवाई करते हुए कहा था कि समिति की रिपोर्ट का एक मसौदा सरकार को मिल गया है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद इसकी ‘सॉफ्ट कॉपी’ (ऑनलाइन प्रति) पीठ के साथ-साथ विभिन्न पक्षों की ओर से पेश होने वाले वकील को 15 फरवरी, 2024 को या उससे पहले प्रदान की जानी चाहिए।

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